IDBI Bank की बिक्री पर Rahul Gandhi का प्रहार, कहा सार्वजनिक संपत्ति जनता की

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण का कड़ा विरोध करते हुए कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सात साल पहले घाटे में रहने वाले बैंक ने पिछले साल 9000 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया। कांग्रेस नेता के मुताबिक लाभ कमाने वाले सार्वजनिक संस्थानों को बेचना राष्ट्र निर्माण के सिद्धांतों के विपरीत है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के प्रति समर्थन जताते हुए शुक्रवार को कहा कि सार्वजनिक धन से बने संस्थान जनता के हैं और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बेचा नहीं जाना चाहिए। कांग्रेस नेता ने आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के नाम लिखे एक पत्र को ‘एक्स’ पर साझा किया और बैंक की प्रस्तावित बिक्री को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पोस्ट में कहा, ‘‘कांग्रेस के समय में आईडीबीआई बना, देश का उद्योग खड़ा करने के लिए।

मोदी के समय में पहले बोली देखी गई, फिर दाम तय हुआ। कांग्रेस के समय बैंक बनते थे। मोदी के समय में बिकते हैं।

मैं आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं।’’ गांधी ने पत्र में कहा कि पिछले साल मार्च में आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के एक समूह ने संसद भवन में उनसे मुलाकात की थी और सवाल किया था कि सरकार उस बैंक को क्यों बेच रही है जिसे कर्मचारियों ने मुनाफे में पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा लोकसभा में उठाया और सरकार से पूछा कि एक लाभ कमाने वाले सार्वजनिक बैंक को क्यों बेचा जा रहा है तथा उसके कर्मचारियों एवं जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि सरकार ने इसका कोई कारण नहीं बताया और अब उसने आईडीबीआई बैंक को कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को बेचने का फैसला किया है।

गांधी के मुताबिक, आईडीबीआई की शुरुआत एक अग्रणी विकास बैंक के रूप में हुई थी और वाणिज्यिक बैंक बनने तक का उसका सफर कठिन रहा है। उन्होंने कहा कि सात साल पहले आईडीबीआई बैंक घाटे में था, जबकि पिछले साल उसने 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया। गांधी ने बैंक कर्मचारियों से कहा, ‘‘यह बदलाव आपकी मेहनत का नतीजा है।’’ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सार्वजनिक धन से बनाया गया संस्थान जनता का होता है।

उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की बैंक में कुल 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो बिक्री के बाद घटकर 34 प्रतिशत रह जाएगी। गांधी ने कहा कि 2003 में सरकार ने संसद को आश्वासन दिया था कि आईडीबीआई में उसकी हिस्सेदारी हमेशा कम से कम 51 प्रतिशत रहेगी। उन्होंने कहा, ‘‘यह वादा भले ही कानून में दर्ज न हो, लेकिन संसद से किया गया वादा भारत की जनता से किया गया वादा है।’’ कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि आईडीबीआई के निजी स्वामित्व में जाने के बाद अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण समाप्त हो जाएगा तथा कर्मचारियों की सेवा शर्तों को मिलने वाला संरक्षण भी प्रभावित होगा।

गांधी का कहना है कि कांग्रेस हमेशा मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र के साथ निजी क्षेत्र के काम करने में विश्वास करती रही है। उन्होंने कहा, ‘‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बेचने के लिए संपत्ति नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण के साधन हैं।’’ कर्मचारियों को समर्थन का भरोसा दिलाते हुए गांधी ने कहा, ‘‘आपने मुझसे आपके साथ खड़े होने को कहा था। मैं आज आपकी लड़ाई में आपके साथ खड़ा हूं और आपकी सभी जायज मांगों का पूरा समर्थन करता हूं।’’ उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट और दृढ़ रहने का आह्वान किया।

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