New Delhi में BRICS Parliamentary Forum शुरू, 11 सदस्य देशों के साथ AI और सतत विकास पर होगी चर्चा

नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया। मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सहित कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने इसमें भाग लिया। यह दो दिवसीय सम्मेलन लोकतांत्रिक मूल्यों, जन-केंद्रित विकास और भविष्य की योजनाओं के लिए संसदीय सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित है।
मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सोमवार को 12वीं ब्रिक्स संसदीय मंच (BRICS Parliamentary Forum) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह बैठक विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने, कमियों की पहचान करने और भविष्य की पहलों के लिए एक रोडमैप तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है। तोमर ने बताया कि इस बैठक में सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि और भारत के विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्ष हिस्सा ले रहे हैं। तोमर ने ANI से कहा यह ब्रिक्स संसदीय मंच की 12वीं बैठक है। इसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि मौजूद हैं। हमारे देश के विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष भी इसमें भाग ले रहे हैं। मेरा मानना है कि इस तरह की बैठकें कई तरह के मुद्दों पर चर्चा करने का मौका देती हैं। इनसे कमियों और कमजोरियों को पहचानने में मदद मिलती है, साथ ही भविष्य की पहलों के लिए एक रोडमैप भी तैयार होता है। इन चर्चाओं से जो सुझाव सामने आते हैं, वे वैश्विक प्रगति के लिए बहुत फायदेमंद साबित होते हैं।
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उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा, "मैं इस ब्रिक्स सम्मेलन की पूर्ण सफलता की कामना करता हूँ।" भारत की संसद द्वारा आयोजित दो दिवसीय 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में हो रही है। इसमें भाग लेने के लिए ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे हैं। आज इस मंच का उद्घाटन समारोह शुरू हुआ, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष और मंच के अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्घाटन भाषण दिया। "जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को बढ़ावा देना" (Fostering Parliaments for People-Centric Development) विषय पर आधारित इस उच्च-स्तरीय बहुपक्षीय मंच का उद्देश्य लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक-केंद्रित विकास एजेंडे और विधायी निकायों को संस्थागत रूप से मजबूत करने पर चर्चा को बढ़ावा देना है। दो दिवसीय इस सम्मेलन में चार उच्च-स्तरीय सत्र होंगे, जो मुख्य रूप से लचीलेपन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और स्थिरता (Sustainability) जैसे स्तंभों पर केंद्रित होंगे। इन चर्चाओं में संस्थागत क्षमता निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में विधायी निगरानी की बढ़ती भूमिका, उभरती डिजिटल प्रौद्योगिकियां और सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals) जैसे विषय शामिल होंगे। मुख्य सत्रों के साथ-साथ, सदस्य और साझेदार देशों की अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी संसदीय समितियों के अध्यक्षों की एक विशेष बैठक भी होगी। इसमें संसदीय कूटनीति, क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम विधायी प्रथाओं के आदान-प्रदान पर विचार-विमर्श किया जाएगा। यह मंच प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, वैश्विक संसदीय सहयोग को नई गति देने के लिए 64 देशों के साथ गठित 'संसदीय मैत्री समूहों' (Parliamentary Friendship Groups) की बैठकें भी आयोजित की जाएंगी।
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