Satya Niketan हादसे पर Manoj Jha ने PM Modi को लिखा पत्र, छात्रों के लिए हॉस्टल निर्माण की मांग की

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राजद सांसद और डीयू के प्रोफेसर मनोज झा ने सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना के बाद प्रधानमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए सरकारी छात्रावासों के निर्माण हेतु आपात वित्तीय आवंटन की मांग उठाई। इस हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है।

नयी दिल्ली, सात सितंबर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सदस्य और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के प्रोफेसर मनोज झा ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद ‘‘तत्काल हस्तक्षेप’’ करने की मांग की और कहा कि इस त्रासदी ने विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए आवास की ‘‘गंभीर समस्या’’ को उजागर किया है। झा ने केंद्र से दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए सरकारी छात्रावासों के निर्माण के वास्ते आपात और अलग से निर्धारित वित्तीय आवंटन करने का आग्रह किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘साउथ कैंपस’ के पास रविवार को बहुमंजिला इमारत ढहने की घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है।

बचाव एजेंसियों ने मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला है। झा ने कहा कि संरचनात्मक नियमों के उल्लंघन, पानी जमा होने और जर्जर इमारत में निर्माण या मरम्मत कार्य की खबरों ने नियामकीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे की निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन इसके साथ यह भी देखना होगा कि व्यवस्था की ऐसी कौन-सी बड़ी खामी थी, जिसके कारण छात्रों को शुरू से ही इतनी असुरक्षित इमारत में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।” उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने छात्रों के एक छोटे से हिस्से को ही छात्रावास उपलब्ध करा पाता है, जिस कारण हजारों छात्र आसपास के इलाकों में अधिक किराया देकर और अनियमित रूप से रहने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि छात्र छोटे कमरों के लिए अत्यधिक किराया देते हैं, जबकि भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा और कानूनी स्थिति की जांच करना उनके लिए मुश्किल होता है। झा ने कहा कि केंद्र सरकार, विश्वविद्यालय और उसकी एजेंसियों के पास उपलब्ध जमीन को चिह्नित कर छात्रावास बनाए जाने चाहिए तथा महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगों और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए। उन्होंने सत्य निकेतन हादसे को दिल्ली और देश में सार्वजनिक एवं नागरिक बुनियादी ढांचे के व्यापक संकट से जोड़ते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं भ्रष्टाचार, मिलीभगत, लापरवाही और जवाबदेही की कमी की ओर इशारा करती हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री से इसे राष्ट्रीय चेतावनी के रूप में लेने और छात्र सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया।

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