Mercedes Case: नाबालिग की Bail अर्जी में प्रक्रियागत खामियां, Special Court ने शनिवार तक टाली सुनवाई

Kerala
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अभिनय आकाश । Oct 30 2026 3:28PM

केरल में जज के 17 वर्षीय बेटे द्वारा मर्सिडीज से हुए जानलेवा हादसे में उसकी जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई प्रक्रियागत खामियों के चलते शनिवार तक टल गई है। इस दुर्घटना में एक स्कूटर सवार की मौत हो गई थी। मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद जज ने उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी है।

केरल में एक जानलेवा कार दुर्घटना के मामले में, एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के 17 वर्षीय बेटे को मिली जमानत रद्द करने की मांग वाली अभियोजन पक्ष की अपील पर सुनवाई शनिवार तक के लिए टाल दी गई है, क्योंकि अदालत को इसे दाखिल करने की प्रक्रिया में कुछ कमियां मिलीं। महिलाओं और बच्चों के लिए बनी विशेष अदालत ने अभियोजन पक्ष को इन गलतियों को सुधारने और सही की गई अपील फिर से दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने आवेदन को अपील के बजाय याचिका के रूप में दायर किया था। अदालत ने यह भी गौर किया कि इस आवेदन में नाबालिग का नाम उजागर कर दिया गया था।

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आवेदन जमा करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए, अदालत ने अभियोजन पक्ष से पूछा कि क्या इस तरह की याचिका इसी प्रकार दायर की जानी चाहिए, और उन्हें जरूरी सुधार करने का निर्देश दिया। अब इस मामले की सुनवाई शनिवार को होगी। यह नया घटनाक्रम तब सामने आया है जब पुलिस की जांच और उस नाबालिग को मिली जमानत पर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला एक मर्सिडीज-बेंज कार से हुए जानलेवा हादसे से जुड़ा है, जो उसके पिता के नाम पर रजिस्टर्ड है। यह हादसा इस हफ्ते की शुरुआत में हुआ था। जज के बेटे द्वारा चलाई जा रही कार ने पीछे से एक स्कूटर को टक्कर मार दी, जिससे स्कूटर सवार 55 वर्षीय जयबालकृष्णन की मौत हो गई। जयबालकृष्णन सड़क किनारे खाने-पीने की दुकान चलाते थे।

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जज ने अग्रिम जमानत मांगी


इस मामले ने जज को भी जांच के दायरे में ला दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने केरल उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी है। उनका कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके नाबालिग बेटे ने मर्सिडीज-बेंज कार बाहर निकाली है। अपनी अर्जी में जज ने बताया कि उन्हें दुर्घटना के बाद आए एक फोन कॉल से ही इस हादसे के बारे में पता चला। पुलिस ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के तहत जज को आरोपी बनाया है। यह धारा किसी नाबालिग द्वारा किए गए अपराधों के लिए उसके अभिभावक या वाहन के मालिक की जिम्मेदारी तय करती है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच जिला अपराध शाखा (डिस्ट्रिक्ट क्राइम ब्रांच) को सौंप दी गई थी। इससे पहले केरल उच्च न्यायालय ने पुलिस को जज को आरोपी बनाने की अनुमति दे दी थी।
 

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