KIIFB की 31,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं आगे बढ़ा रही केरलम सरकार, मुख्यमंत्री सतीशन का दावा

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केरलम विधानसभा में मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने बुधवार को विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को रोका नहीं गया है। उन्होंने दावा किया कि केआईआईएफबी के कर्ज ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर भारी दबाव डाला है और इससे उधारी सीमा 12,000 करोड़ रुपये घट गई है। वहीं विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने सरकार पर जनहित की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने बुधवार को विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के इस आरोप को खारिज कर दिया कि केरल अवसंरचना निवेश कोष बोर्ड (केआईआईएफबी) की परियोजनाओं को जानबूझकर बाधित किया गया है या रोक दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार इस संगठन द्वारा शुरू किए गए 31,000 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों को आगे बढ़ा रही है। सतीशन ने यह भी दावा किया कि केआईआईएफबी द्वारा लिए गए कर्ज ने राज्य को आर्थिक संकट में धकेल दिया है।

उनके अनुसार, एलडीएफ के शासनकाल के दौरान तीन वित्तीय वर्षों की चौथी तिमाही तक नियोजित धनराशि में 50 प्रतिशत की कटौती की गई। उनके दावों को खारिज करते हुए राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने कहा कि केरलम ने केआईआईएफबी के धन के जरिये सार्वजनिक विकास का उदाहरण पेश किया था, लेकिन मौजूदा प्रशासन केंद्र के कॉरपोरेट संस्कृति और निजीकरण के एजेंडे को लाभ पहुंचाने के लिए इसे बाधित करने की कोशिश कर रहा है। विजयन ने आरोप लगाया कि विभिन्न आर्थिक नीतियों के जरिये राज्य की वित्तीय स्वतंत्रता में केंद्र के हस्तक्षेप के सामने यूडीएफ सरकार ने ‘आत्मसमर्पण’ कर दिया है।

इन नीतियों में केरलम की कर्ज लेने की सीमा में कटौती भी शामिल है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन द्वारा विपक्षी विधायकों के. एन. बालगोपाल और जी. आर. अनिल के स्थगन प्रस्ताव को अनुमति देने से इनकार किए जाने के बाद सदन से बहिर्गमन के दौरान यह बात कही। विपक्षी विधायकों ने दावा किया था कि केआईआईएफबी की विभिन्न परियोजनाएं रोक दी गई हैं या उनकी प्रगति बाधित हुई है और उन्होंने इसके कामकाज के खिलाफ विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर चर्चा कराने की मांग की थी।

अपने संबोधन में विजयन ने इस रिपोर्ट को प्रतिगामी करार दिया और कहा कि समिति ने केआईआईएफबी के कामकाज का विश्लेषण मुनाफे पर केंद्रित व्यावसायिक इकाइयों के पैमाने पर किया है। मार्क्सवादी नेता ने कहा कि स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किया गया धन मुनाफा कमाने के लिए नहीं, बल्कि जनकल्याण में निवेश है। उन्होंने कहा, केआईआईएफबी को बंद करने से बुनियादी ढांचे के विकास की 1,500 परियोजनाएं समाप्त हो जाएंगी।

मैं सरकार और मुख्यमंत्री से आग्रह करता हूं कि वे इसे मुनाफा कमाने के नजरिये से न देखें, क्योंकि यह जनकल्याण में निवेश है। इससे पहले, सतीशन ने नोटिस पर चर्चा करने से इनकार करते हुए दावा किया कि केआईआईएफबी ऋणों के पुनर्भुगतान के कारण सरकारी खजाने से धन बाहर चला गया, जो करदाताओं के पैसे की लूट के समान है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच की जाएगी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दी जाएगी।

उन्होंने विपक्ष के आरोपों को ‘निराधार’ बताते हुए कहा कि केआईआईएफबी द्वारा शुरू किए गए कार्यों के साथ-साथ उन परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा, जिनके लिए अब तक कोई समझौता या अनुबंध नहीं हुआ है। इन सभी की कुल लागत 31,000 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि इन परियोजनाओं और अन्य ऐसी परियोजनाओं के लिए केआईआईएफबी द्वारा लिया जाने वाला कर्ज (जिन्हें एलडीएफ सरकार के दौरान मंजूरी दी गई थी) सरकार पर 70,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डालेगा।

सतीशन ने दावा किया, इससे राज्य की कर्ज लेने की सीमा और कम हो जाएगी, जो पहले ही पिछले वर्ष की तुलना में 12,000 करोड़ रुपये घट चुकी है। इसकी वजह केआईआईएफबी द्वारा लिया गया कर्ज है।

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