Karnataka Assembly का 3 दिवसीय विशेष सत्र 21 सितंबर से, सूखे और Kasturirangan Report पर होगी चर्चा

कर्नाटक विधानसभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र 21 सितंबर से शुरू होगा, जिसमें सूखे की स्थिति और पश्चिमी घाट पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी। कस्तूरीरंगन रिपोर्ट का विरोध करने पर सभी दल मोटे तौर पर सहमत हैं, लेकिन सूखा प्रबंधन और किसानों को राहत के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।
कर्नाटक विधानसभा का तीन दिन का विशेष सत्र 21 सितंबर से शुरू होगा। इसमें राज्य के सामने मौजूद दो अहम मुद्दों पर चर्चा होगी: सूखे की स्थिति और पश्चिमी घाट में पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट। जहां सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी पार्टियां BJP और JD(S) कस्तूरीरंगन रिपोर्ट का विरोध करने पर मोटे तौर पर सहमत दिख रही हैं, वहीं सूखे के मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष ने सरकार पर स्थिति को संभालने और किसानों को पर्याप्त राहत देने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस ने केंद्र से सहयोग न मिलने की बात कही है। यह विशेष सत्र इसलिए बुलाया गया है क्योंकि पिछले महीने हुए मॉनसून सत्र के दौरान विधानसभा सूखे की स्थिति और पश्चिमी घाट के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाके पर केंद्र के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर राज्य की प्रतिक्रिया पर चर्चा नहीं कर पाई थी।
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मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के विरोध के कारण वह सत्र बाधित हुआ और उसे समय से पहले खत्म करना पड़ा। कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर आधारित सातवां ड्राफ्ट केंद्र सरकार ने 27 जुलाई, 2026 को जारी किया था और इस पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 60 दिन का समय दिया था। कर्नाटक ने केंद्र के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को बार-बार खारिज किया है। नए ड्राफ्ट में छह राज्यों में फैले 56,000 वर्ग किलोमीटर इलाके को पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव है। कर्नाटक में, 10 जिलों - बेलगावी, चामराजनगर, चिकमगलूर, कोडगु, हासन, उत्तर कन्नड़, दक्षिण कन्नड़, मैसूरु, शिवमोग्गा और उडुपी - के 33 तालुकों और 1,449 गांवों का 20,668 वर्ग किलोमीटर इलाका इसके दायरे में आता है। राज्य का कहना है कि इससे किसानों की आजीविका और भविष्य के विकास पर बुरा असर पड़ेगा।
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यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब कर्नाटक के कई इलाके सूखे की चपेट में हैं। अब तक 124 तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित किया जा चुका है और दूसरे इलाकों में भी आकलन का काम चल रहा है। रविवार को सकलेशपुरा में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट समेत लोगों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए यह विशेष सत्र बुलाया है। उन्होंने कहा कि दोनों सदनों के सदस्यों को अपनी राय रखने का मौका दिया जाएगा। शिवकुमार ने बताया कि कई जिलों के विधायकों और जन-प्रतिनिधियों के साथ पहले ही चर्चा हो चुकी है और उडुपी, चिकमगलूर, हासन और शिवमोग्गा जिलों में लोगों की राय भी ली गई है। उन्होंने कहा कि सरकार फैसला लेते समय प्रभावित इलाकों के निवासियों की समस्याओं पर भी विचार करेगी।
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