Traffic Challan अपील पर 50% रकम जमा करने की शर्त का विरोध, Delhi Courts में ठप रहा काम

दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने ट्रैफिक चालान निपटारे की नई व्यवस्था के विरोध में कामकाज ठप रखा। वे चालान विवादों को न्यायिक मजिस्ट्रेट के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपने और अपील हेतु 50 प्रतिशत राशि जमा करने की शर्त का विरोध कर रहे हैं। वकीलों के अनुसार यह बदलाव नागरिकों के न्याय पाने के अधिकार में बाधा है।
दिल्ली ज़िला अदालतों के वकीलों ने सोमवार को न्यायिक कामकाज से दूरी बनाए रखी। वे सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 के नियम 167 के तहत विवादित ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए बदले गए सिस्टम का विरोध कर रहे थे। दिल्ली की सभी ज़िला अदालत बार एसोसिएशन की कोऑर्डिनेशन कमिटी के बैनर तले, वकीलों ने न्यायिक कामकाज से दूरी बनाए रखी। वे न्यायिक मजिस्ट्रेटों से सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट और अलग-अलग सरकारी विभागों के अधिकारियों को निपटारे का काम सौंपने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे। 20 सितंबर को जारी एक सर्कुलर में, कोऑर्डिनेशन कमिटी ने कहा कि बदले हुए नियम 167 के अनुसार, जिस व्यक्ति का चालान काटा गया है, वह या तो चालान की रकम स्वीकार कर उसका भुगतान कर सकता है या फिर चालान जारी होने के 45 दिनों के भीतर तय अधिकारी के सामने दस्तावेज़ी सबूतों के साथ उसे चुनौती दे सकता है।
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समिति ने खास तौर पर उस नियम पर आपत्ति जताई है जिसके तहत अगर किसी व्यक्ति की चालान के खिलाफ चुनौती खारिज हो जाती है, तो उसे सक्षम अदालत में जाने से पहले चालान की रकम का 50 प्रतिशत जमा करना होगा। समिति के अनुसार, संशोधित व्यवस्था राज्य सरकार को चालान से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए अधिकारियों को नियुक्त करने का अधिकार भी देती है। समिति ने कहा कि बाद में उसे मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि इस काम के लिए खाद्य और आपूर्ति विभाग के अधिकारियों, तहसीलदारों और जिला परिवहन व प्रवर्तन कार्यालयों के अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। समिति ने कहा कि उसने पहले भी दिल्ली सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया था और 27 अगस्त व 7 सितंबर को अपनी बात रखी थी। समिति ने बताया कि कानून और न्याय मंत्री के साथ हुई बैठकों में यह भरोसा दिलाया गया था कि SDM और अन्य विभागीय अधिकारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव तब तक लागू नहीं किया जाएगा जब तक कि इस मामले पर केंद्र सरकार से चर्चा न हो जाए। हालांकि, वकीलों के संगठन ने कहा कि बाद में उन्हें पता चला कि विवादित चालानों के निपटारे के लिए अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को नियुक्त कर दिया गया है। इस घटनाक्रम को चिंता का विषय बताते हुए समिति ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, क्योंकि इसमें नागरिकों का यह अधिकार भी शामिल है कि विवादित चालानों का निपटारा किसी सक्षम न्यायिक मंच द्वारा किया जाए।
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इसने न्यायिक मजिस्ट्रेटों से कार्यकारी और विभागीय अधिकारियों को न्यायिक कामकाज सौंपने के प्रस्ताव का भी विरोध किया। समिति ने न्यायिक कामकाज को कार्यकारी या प्रशासनिक कार्यों से अलग करने को लेकर चिंता जताई। समिति ने कहा कि किसी फैसले के खिलाफ अदालत में अपील करने के लिए 50 प्रतिशत रकम पहले जमा करने की अनिवार्य शर्त नागरिकों के लिए बाधा बन सकती है। 19 सितंबर को हुई बैठक के बाद, समन्वय समिति ने इन बदलावों के विरोध में 21 सितंबर को एक दिन के लिए काम से दूर रहने का सर्वसम्मति से फैसला किया। समन्वय समिति ने सदस्यों से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से विरोध में शामिल होने की अपील की और कहा कि इस कदम का मकसद न्यायिक कामकाज और न्याय तक पहुंच को लेकर अपनी चिंताओं को उजागर करना है। नई दिल्ली बार एसोसिएशन (NDBA) के सदस्य इंडिया गेट सर्कल पर जमा हुए और अपना विरोध दर्ज कराने के लिए मार्च निकाला।
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