ओडिशा में बचाए गए 5 Orangutan पर इंडोनेशिया ने अब तक नहीं दिया मालिकाना हक का सबूत

बालासोर के जंगल से बरामद किए गए पांच ओरंगुटान पर इंडोनेशिया या अन्य किसी देश ने फिलहाल कोई आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं किया है। ओडिशा के वन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने बताया कि यदि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत प्रमाण मिलते हैं तभी इन्हें सौंपा जाएगा। राज्य सरकार की मंशा इन सभी स्वस्थ शावकों को नंदनकानन चिड़ियाघर में ही रखने की है।
भुवनेश्वर, आठ नवंबर ओडिशा के जंगल से दो महीने पहले बचाए गए पांच ओरंगुटान पर अपना मालिकाना हक साबित करने के लिए इंडोनेशिया या किसी अन्य देश ने अब तक कोई दस्तावेजी सबूत नहीं दिया है। राज्य के वन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने रविवार को यह जानकारी दी। खुंटिया ने संवाददाताओं से कहा कि पांचों ओरंगुटान स्वस्थ हैं।
उन्होंने इन ओरंगुटान को नंदनकानन चिड़ियाघर में ही रखे जाने की राज्य की इच्छा जताई। उन्होंने कहा, ‘‘पांचों ओरंगुटान स्वस्थ हैं और बड़े हो रहे हैं। किसी को उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए।
हम चाहते हैं कि वे ओडिशा में ही रहें और पर्यटकों को नंदनकानन चिड़ियाघर में उन्हें देखने का मौका मिले।’’ मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार नियमों के तहत कुछ देश इन जानवरों पर अपना दावा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें ठोस सबूत देने होंगे कि बचाए गए ये जानवर उनके देश से लाए गए थे। खुंटिया ने कहा, ‘‘इंडोनेशिया सरकार ने सामान्य प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश किया है। हम यह साबित करने के लिए सबूत मांगेंगे कि ओरंगुटान उसी देश से लाए गए थे।
यदि वे प्रमाण देते हैं, तो इन जानवरों को उन्हें सौंपा जा सकता है।’’ उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने आवश्यक कार्रवाई के लिए बचाए गए जानवरों का विवरण केंद्र सरकार को सौंप दिया है। मंत्री ने कहा, ‘‘ओडिशा में ओरंगुटान के रहने के लिए अनुकूल वातावरण है। इसलिए हम चाहते हैं कि वे यहीं रहें।’’ पांचों ओरंगुटान शावकों को आठ सितंबर को बालासोर जिले के बिचित्रपुर जंगल से बचाया गया था।
इसके बाद उन्हें नंदनकानन चिड़ियाघर ले जाया गया, जहां उन्हें पृथकवास में रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि जानवरों को तापमान नियंत्रित कमरे में रखा गया है और वे धीरे-धीरे स्थानीय वातावरण के अनुकूल हो रहे हैं। राज्य सरकार ने उनके आराम और तनाव से उबरने में मदद के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इन जानवरों में कई तरह की भावनात्मक प्रतिक्रियाएं देखी गई हैं। वे कभी खेलते हैं, कभी थोड़े समय के लिए उनका मिजाज बदलता है और कभी वे घबराकर एक-दूसरे से चिपक जाते हैं। नंदनकानन चिड़ियाघर में पहले से ही ओरंगुटान के लिए एक विशेष बाड़ा है, जो 2019 में 41 वर्षीय मादा ओरंगुटान की मौत के बाद से खाली पड़ा है।
अधिकारियों ने बताया कि उस मादा ओरंगुटान को 2003 में पुणे के एक चिड़ियाघर से लाया गया था। ओरंगुटान के बालासोर पहुंचने के कारणों का पता लगाने के लिए ओडिशा पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) की संयुक्त जांच जारी है। जांचकर्ता अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी गिरोह की संभावित संलिप्तता की भी पड़ताल कर रहे हैं।
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