Uttarakhand CM Pushkar Dhami ने कैसे बदली देवभूमि की तस्वीर, कानून से इंफ्रा तक बड़ा बदलाव

CM Pushkar Dhami
ANI
एकता । Jul 9 2026 3:58PM

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड, देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानून और कड़े धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे ऐतिहासिक सुधारों को लागू किया है, जिनका उद्देश्य राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करना और शासन में पारदर्शिता लाना है।

उत्तराखंड में पिछले पांच वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने नीतिगत निरंतरता, शासन सुधार और योजनाओं को जमीन पर उतारने पर विशेष ध्यान दिया है। राजनीतिक अस्थिरता के पुराने दौर से बाहर निकलकर इस सरकार को प्रशासनिक निरंतरता का पूरा लाभ मिला है। सरकार ने इस स्थिरता का उपयोग लंबे समय से लंबित विधायी सुधारों को पूरा करने और इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए किया है। प्रशासन का मानना है कि इस स्थिर शासन से नीतियों को तेजी से लागू करने, पारदर्शिता बढ़ाने और राज्य के दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव तैयार हुई है।

यूनिफॉर्म सिविल कोड का ऐतिहासिक निर्णय

धामी सरकार के सबसे बड़े और ऐतिहासिक सुधारों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लागू करना शामिल है, जो 27 जनवरी 2025 से पूरे राज्य में प्रभावी हो चुका है। इसके साथ ही उत्तराखंड विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस कानून ने धर्म-आधारित व्यक्तिगत नागरिक कानूनों की जगह ले ली है। सरकार के अनुसार, इस कानून का उद्देश्य कानूनी एकरूपता और लैंगिक न्याय को बढ़ावा देना है, साथ ही बाल विवाह, बहुविवाह, तीन तलाक, हलाला और इद्दत जैसी प्रथाओं पर रोक लगाना है।

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देश का सबसे सख्त एंटी-कॉपींग कानून

भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों पर कड़ा एक्शन लेते हुए राज्य सरकार ने उत्तराखंड सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 लागू किया। इसे देश के सबसे कड़े नकल विरोधी कानूनों में से एक माना जाता है। इस कानून के तहत संगठित रूप से नकल कराने वाले रैकेट, कोचिंग संस्थानों, सर्विस प्रोवाइडर्स और प्रिंटिंग प्रेसों के शामिल होने पर आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा, अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले उम्मीदवारों को भी जेल, भारी जुर्माने और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं से 10 साल तक के लिए प्रतिबंधित किए जाने की सजा मिल सकती है।

दंगाईयों और उपद्रवियों से नुकसान की वसूली

राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उत्तराखंड सार्वजनिक और निजी संपत्ति नुकसान वसूली अध्यादेश, 2024 लाया गया। यह कानून अधिकारियों को दंगों, विरोध प्रदर्शनों, हड़तालों और बंद के दौरान सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले उपद्रवियों से ही नुकसान की पूरी भरपाई करने का अधिकार देता है। इसमें पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने में हुए खर्च की वसूली का भी नियम है, साथ ही 8 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इन मामलों की सुनवाई के लिए एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में एक समर्पित क्लेम्स ट्रिब्यूनल को भी मंजूरी दी गई है।

सख्त हुआ धर्मांतरण विरोधी कानून

अगस्त 2024 में सरकार ने राज्य के अवैध धर्मांतरण विरोधी कानून का दायरा बढ़ाकर इसमें सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी शामिल कर लिया। ऐसा करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना। इस नए संशोधन के तहत अवैध धार्मिक धर्मांतरण के लिए अधिकतम सजा को 10 साल से बढ़ाकर 14 साल कर दिया गया है, जबकि कुछ गंभीर मामलों में यह सजा 20 साल या आजीवन कारावास तक हो सकती है। इसके तहत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को बिना वारंट के आरोपियों को गिरफ्तार करने और अवैध धर्मांतरण से बनाई गई संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार दिया गया है। इसमें पैसे, नौकरी, उपहार, मुफ्त शिक्षा या बेहतर जीवनशैली का लालच देने को भी अवैध माना गया है।

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अवैध कब्जों और अतिक्रमण पर कड़ा प्रहार

धामी सरकार ने सरकारी और वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अनधिकृत संरचनाओं को हटाना, सरकारी जमीन को वापस पाना और सार्वजनिक संपत्ति की बेहतर निगरानी करना है। इस कार्रवाई के तहत सैकड़ों अवैध निर्माणों को ढहाया गया है और हजारों एकड़ भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। जिला प्रशासनों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे जमीनों के लेन-देन पर कड़ी नजर रखें और नए बसने वाले लोगों का सत्यापन करें ताकि भविष्य में अवैध कब्जों को रोका जा सके।

टेक्नोलॉजी और डीबीटी से पारदर्शिता

उत्तराखंड सरकार कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाने के लिए टेक्नोलॉजी और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रही है। हाल ही में उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत प्रसूति सहायता, शिक्षा सहायता, विवाह सहायता और मृत्यु अनुदान जैसी योजनाओं के माध्यम से 4,400 से अधिक लाभार्थियों के बैंक खातों में लगभग 11 करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए। पिछले एक साल में इस कल्याण बोर्ड ने 24,000 से अधिक पंजीकृत श्रमिकों को 93 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बांटी है।

महिला सशक्तिकरण और लखपति दीदी योजना

महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने कल्याणकारी एजेंडे में कई कदम उठाए हैं। लखपति दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को अपनी आय बढ़ाने के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, राज्य की एक लाख महिलाएं इस योजना के जरिए तय आय के स्तर को पार कर चुकी हैं। इसके अलावा, जमीनी स्तर की संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सहकारी समितियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण भी दिया गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का विस्तार

राज्य में रोजगार और आर्थिक अवसरों को बढ़ाने के लिए हाईवे, रेलवे, हवाई कनेक्टिविटी, सीमावर्ती बुनियादी ढांचे और धार्मिक पर्यटन में भारी निवेश किया जा रहा है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का काम अंतिम चरण में है, जिसमें गणेशपुर से आशारोड़ी के बीच 12 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर और डाटकाली मंदिर के पास 340 मीटर की सुरंग का काम पूरा हो चुका है। इस एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने के बाद दिल्ली से देहरादून का सफर घटकर सिर्फ ढाई घंटे का रह जाएगा। इसके साथ ही, राज्य को दो वंदे भारत ट्रेनें भी मिली हैं, जिससे प्रमुख शहरों से कनेक्टिविटी बेहतर हुई है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और आयुष्मान योजना

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार ने अपनी योजनाओं का दायरा काफी बढ़ाया है। अटल आयुष्मान योजना के तहत अप्रैल 2025 के अंत तक 59.74 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं, और 15 लाख से अधिक लाभार्थियों ने इसके तहत कैशलेस इलाज का लाभ उठाया है। यह योजना हर पात्र परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर देती है, जिससे गरीब परिवारों पर इलाज के खर्च का बोझ कम हुआ है। इसके साथ ही, सरकार पहाड़ी और सीमावर्ती जिलों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश कर रही है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की कमी रही है।

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