Hemant Soren के गांव Nemra में छात्र नेता की मुहिम का विरोध, सड़क जाम

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झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित मुख्यमंत्री के पैतृक गांव नेमरा में ग्रामीणों ने सोमवार को पारंपरिक हथियारों के साथ मार्ग अवरुद्ध कर दिया। स्थानीय लोगों को अंदेशा था कि भर्ती सुधार अभियान शुरू करने आ रहे देवेंद्र नाथ महतो गांव में मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर सकते हैं। हालांकि, छात्र संगठन के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि विरोध के बावजूद उनका राज्यव्यापी अभियान जारी रहेगा।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गांव नेमरा के निवासियों ने सोमवार को छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की प्रस्तावित परीक्षा सुधार मुहिम के विरोध में सड़क जाम कर दी। ग्रामीणों को आशंका है कि महतो का संगठन गांव में मुख्यमंत्री के पुतले जला सकता है। पारंपरिक हथियारों और लाठियों से लैस ग्रामीणों ने रामगढ़ जिले में गांव की ओर जाने वाली सड़क को जाम कर दिया।

महतो ‘जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच’ के बैनर तले भर्ती परीक्षाओं में सुधार की मांग को लेकर राज्यव्यापी अभियान शुरू करने वाले हैं। इसके तहत गांव के लुकैयाटांड़ में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देने के बाद अभियान की शुरुआत की जानी है। ग्रामीण बिरजू सोरेन ने कहा, “हमने महतो को नेमरा में प्रवेश करने से रोकने के लिए सड़क जाम की है।” उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि महतो गांव में मुख्यमंत्री के पुतले जलाएंगे।

जब उन्हें बताया गया कि महतो भर्ती परीक्षाओं में सुधार की मांग को लेकर राज्यव्यापी अभियान शुरू करने आ रहे हैं, तो बिरजू सोरेन ने कहा, “महतो गांव के बाहर स्थित शिबू सोरेन की प्रतिमा के पास से अपना अभियान शुरू कर सकते हैं लेकिन हम उन्हें गांव में प्रवेश नहीं करने देंगे।” महतो के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे कार्यक्रम स्थल की ओर पहुंच रहे हैं और ग्रामीणों के विरोध से उनके अभियान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इससे पहले महतो ने कहा था कि निष्पक्ष, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती व्यवस्था की मांग को लेकर शुरू किया गया ‘जेपीएससी-जेएसएससी भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती’ अभियान राज्य के सभी 24 जिलों में चलाया जाएगा। महतो ने दावा किया, “राज्यभर के छात्र इस अभियान को लेकर उत्साहित और आशान्वित हैं।

उनका मानना है कि इससे उन्हें न्याय मिलेगा और भर्ती परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता आएगी।” महतो 25 जुलाई को रांची में शुरू हुए भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 26 दिन चले छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द कर दी थीं और 2014 से राज्य लोक सेवा आयोग तथा एक आउटसोर्स एजेंसी द्वारा आयोजित 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए थे। हालांकि, उच्च न्यायालय ने 21 अगस्त को बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के जरिए भर्ती किए गए लोगों की नियुक्तियां रद्द करने वाली अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी थी।

अदालत ने 20 अगस्त को 11वीं और 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षाओं को रद्द करने वाली अधिसूचनाओं तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगा दी थी।

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