Fake Emergency Chapter Controversy | सावधान! सोशल मीडिया पर घूम रही है NCERT की नकली किताब, काउंसिल लेगी कानूनी एक्शन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'इमरजेंसी चैप्टर' क्लास 9 की सोशल साइंस टेक्स्टबुक का हिस्सा है। NCERT ने X पर एक पोस्ट में कहा, 'NCERT ने अपनी टेक्स्टबुक्स की अनधिकृत (unauthorized) और पायरेटेड कॉपियों के प्रिंट और डिजिटल फॉर्मेट में फैलने पर ध्यान दिया है।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों को लेकर एक साथ दो बड़े विवाद सामने आए हैं। एक तरफ जहां कक्षा 9 की सोशल साइंस की किताब में शामिल 'इमरजेंसी चैप्टर' (आपातकाल अध्याय) के नकली और छेड़छाड़ किए गए वर्शन को ऑनलाइन फैलाने का मामला गरमा गया है, वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक में कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक के जरिए पाठ्यक्रम के कथित 'भगवाकरण' को लेकर शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'इमरजेंसी चैप्टर' क्लास 9 की सोशल साइंस टेक्स्टबुक का हिस्सा है। NCERT ने X पर एक पोस्ट में कहा, "NCERT ने अपनी टेक्स्टबुक्स की अनधिकृत (unauthorized) और पायरेटेड कॉपियों के प्रिंट और डिजिटल फॉर्मेट में फैलने पर ध्यान दिया है। क्लास 9 की सोशल साइंस पार्ट 1 की किताब, 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' का एक नकली वर्शन भी सोशल मीडिया, वेबसाइटों और मैसेजिंग ग्रुप्स के ज़रिए शेयर किया जा रहा है।"
NCERT ने ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है और स्टूडेंट्स व टीचर्स को सलाह दी है कि वे NCERT की किताबें सिर्फ़ आधिकारिक स्रोतों - NCERT वेबसाइट (ncert.nic.in), ePathshala और अधिकृत वेंडर्स - से ही लें।
'इमरजेंसी चैप्टर' विवाद पर NCERT का पक्ष
NCERT की टेक्स्टबुक्स सिर्फ़ काउंसिल के आधिकारिक चैनलों के ज़रिए ही पब्लिश और प्रिंट की जाती हैं। आधिकारिक रिलीज़ से पहले किसी भी रूप में किसी भी टेक्स्टबुक को फैलाने की अनुमति नहीं है।
अनौपचारिक स्रोतों से फैलाया जा रहा कंटेंट गलत, अधूरा, उसमें छेड़छाड़ किया हुआ या पूरी तरह से मनगढ़ंत हो सकता है और स्टूडेंट्स, टीचर्स और पेरेंट्स को उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
NCERT ने कहा कि इस तरह का अनधिकृत प्रसार गैर-कानूनी है और कॉपीराइट एक्ट, 1957 और अन्य लागू कानूनों के तहत दंडनीय अपराध है।
विवाद क्या है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, NCERT की 'इमरजेंसी चैप्टर' वाली टेक्स्टबुक में कहा गया है, "भारत में लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती तब देखी गई जब 1975-77 में इमरजेंसी लगाई गई थी। 1970 के दशक की शुरुआत में, इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति जनता में असंतोष बढ़ रहा था।"
इसमें आगे कहा गया है, "जून 1975 में, सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लगाई थी। इस दौरान, ज़्यादातर मौलिक अधिकारों को सस्पेंड कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।"
कर्नाटक के एक ग्रुप ने NCERT की छठी क्लास की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक पर सवाल उठाए
कर्नाटक के शिक्षा अधिकार समूह ने NCERT पर आरोप लगाया है कि वह अपनी नई छठी क्लास की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक के ज़रिए पाठ्यक्रम का "भगवाकरण" करने की कोशिश कर रही है। समूह का आरोप है कि पाठ्यपुस्तक में धार्मिक विषयों को ज़्यादा महत्व दिया गया है, जबकि कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान और खान-पान की विविध परंपराओं को नज़रअंदाज़ किया गया है। 'पीपल्स अलायंस फॉर फंडामेंटल राइट्स टू एजुकेशन' (PAFRE) ने कहा कि 'कृष्ण' नाम की यह पाठ्यपुस्तक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत स्कूली शिक्षा में पौराणिक कथाओं और धार्मिक विषयों को शामिल करने के बड़े चलन को दिखाती है। PAFRE के मुख्य संयोजक निरंजनाराध्य वी.पी. ने एक बयान में दावा किया, "यह पाठ्यक्रम का भगवाकरण करने की एक कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है।"
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उन्होंने पाठ्यपुस्तक का नाम 'कृष्ण' रखने के पीछे के तर्क पर भी सवाल उठाए। PAFRE का आरोप है कि पाठ्यपुस्तक में कर्नाटक की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को नज़रअंदाज़ किया गया है। समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के अनुसार, समूह ने कहा, "कर्नाटक की पहचान आदिकवि पंपा, कुवेम्पु, कोटा शिवराम कारंत और बसवन्ना जैसे महान कवियों और समाज सुधारकों के विचारों और योगदान पर आधारित है। फिर भी NCERT ने 'कृष्ण' नाम चुना है।"
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𝐁𝐞𝐰𝐚𝐫𝐞 𝐨𝐟 𝐅𝐚𝐤𝐞 𝐚𝐧𝐝 𝐏𝐢𝐫𝐚𝐭𝐞𝐝 𝐍𝐂𝐄𝐑𝐓 𝐓𝐞𝐱𝐭𝐛𝐨𝐨𝐤𝐬
— NCERT (@ncert) June 24, 2026
NCERT has noticed the circulation of unauthorized and pirated copies of its textbooks in print and digital formats. A fake version of the 𝐂𝐥𝐚𝐬𝐬 𝐈𝐗 𝐒𝐨𝐜𝐢𝐚𝐥 𝐒𝐜𝐢𝐞𝐧𝐜𝐞 𝐏𝐚𝐫𝐭 𝟏… pic.twitter.com/Ep3FfOmO8M
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