ECI ने बढ़ाई SIR की समय-सीमा तो Chandrashekhar Azad बोले, एक भी वोट छूटना नहीं चाहिए

Chandrashekhar Azad
ANI
अंकित सिंह । Oct 30 2026 3:37PM

भारतीय चुनाव आयोग ने छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की समय-सीमा बढ़ा दी है। इस पर आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने आयोग से अपील की कि कोई भी पात्र मतदाता न छूटे। उन्होंने कहा कि मताधिकार भविष्य तय करता है, इसलिए ECI को आउटरीच और संस्थागत जवाबदेही पर ध्यान देना चाहिए।

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) की समय-सीमा बढ़ाए जाने के बाद, आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने सार्वभौमिक मताधिकार के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने चुनाव अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि कोई भी पात्र मतदाता चुनावी प्रक्रिया से छूट न जाए। इस मुद्दे पर बात करते हुए आज़ाद ने कहा कि एक भी वोट छूटना नहीं चाहिए। वोट देने का अधिकार सबसे बड़ा अधिकार है, क्योंकि यह आपके भविष्य को तय करता है, नीतियों को आकार देता है और ऐसे फैसलों को प्रभावित करता है जिनका असर आपके घर से लेकर पूरे देश तक पड़ता है।

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उन्होंने चुनाव आयोग से यह भी आग्रह किया कि वह व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचने (आउटरीच) को प्राथमिकता दे और संस्थागत जवाबदेही बनाए रखे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी मतदाता प्रक्रिया में शामिल हो सकें। आज़ाद ने आगे कहा कि इसलिए, कोई भी व्यक्ति छूट नहीं जाना चाहिए, भले ही समय-सीमा को और आगे क्यों न बढ़ाना पड़े। जो भी वैध वोट छूट गए हैं, उन्हें ज़रूर शामिल किया जाना चाहिए। चुनाव आयोग को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हर पात्र मतदाता अपना वोट डाले और मतदान का प्रतिशत बढ़े। चुनाव आयोग को इस ज़िम्मेदारी को गंभीरता से लेना चाहिए।

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28 अक्टूबर को, चुनाव आयोग ने छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों - हरियाणा, नागालैंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली - के लिए SIR (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण (रिविज़न) की समय-सीमा बढ़ा दी। यह समय-सीमा उन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर्स) के औपचारिक अनुरोध के बाद बढ़ाई गई है। 29 अक्टूबर को निर्वाचन सदन से जारी आधिकारिक सूचना में दावों और आपत्तियों को सार्वजनिक रूप से दाखिल करने, दावों के निपटारे के लिए नोटिस चरण, और अद्यतन मतदाता सूचियों के अंतिम प्रकाशन से जुड़ी मुख्य समय-सीमाओं में किए गए बदलावों का विवरण दिया गया है।

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