Delhi Medical Procurement Case में पूर्व CPA अधिकारी Neeraj Chopra की जमानत अर्जी खारिज

दिल्ली की एक अदालत ने चिकित्सा खरीद में कथित 800 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी से जुड़े मामले में पूर्व लेखा अधिकारी नीरज चोपड़ा को राहत देने से इनकार कर दिया है। विशेष न्यायाधीश विद्या प्रकाश ने कहा कि मामले में वित्तीय लेन-देन और अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है, इसलिए आरोपी को रिहा करने से जांच प्रभावित हो सकती है।
नयी दिल्ली, दो नवंबर दिल्ली की एक अदालत ने 800 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी धनराशि से जुड़ी चिकित्सा खरीद में कथित घोटाले के मामले में केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के पूर्व लेखा अधिकारी नीरज चोपड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इस चरण में उन्हें रिहा करने से जांच प्रभावित हो सकती है। विशेष न्यायाधीश विद्या प्रकाश ने 31 अक्टूबर को पारित आदेश में कहा कि वित्तीय लेनदेन और अन्य व्यक्तियों एवं संस्थाओं की भूमिका की जांच सहित आगे की पड़ताल अभी जारी है।
अदालत ने कहा, ‘‘आवेदक/आरोपी इस चरण में जमानत की राहत पाने का हकदार नहीं है।’’ हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां केवल जमानत याचिका पर फैसला करने के लिए हैं और इन्हें मामले के गुण-दोष पर राय नहीं माना जाना चाहिए। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) द्वारा दो जून को सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के लिए दवाओं, सर्जिकल सामग्री और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में कथित अनियमितताएं हुई थीं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, निविदा की शर्तें पहले से तय उन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गई थीं, जिनका संबंध सह-आरोपी राजीव कुमार उर्फ राजीव रंगीला से था।
उसने कहा कि प्रतिस्पर्धी बोलीदाताओं को कथित तौर पर बिना किसी वैध आधार के अयोग्य घोषित कर दिया गया और खरीद आदेश मैन्युअल तरीके से जारी किए गए, जबकि निविदाएं ‘जीईएम’ पोर्टल पर आमंत्रित की गई थीं। अभियोजन पक्ष ने 448 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रत्येक मशीन करीब 38 लाख रुपये में खरीदी गई, जबकि निर्माता ने कथित तौर पर आपूर्तिकर्ता कंपनी को ये मशीनें करीब 14.92 लाख रुपये प्रति मशीन की दर से बेची थीं और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) अलग से लिया था। अदालत ने अभियोजन पक्ष के इस दावे का उल्लेख किया कि पांच प्रमुख लाभार्थी कंपनियों को सरकारी खजाने से करीब 839 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया और सरकारी खजाने को कथित तौर पर कई सौ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
सीपीए के पूर्व उप नियंत्रक (लेखा) चोपड़ा को 27 जून को तत्कालीन स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. वत्सला अग्रवाल के साथ गिरफ्तार किया गया था। एक अन्य सह-आरोपी और सीपीए में तत्कालीन कार्यालय प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को 18 जून को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, राजीव रंगीला को 24 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।
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