Jammu Darbar Move: श्रीनगर से कर्मचारियों की रवानगी शुरू, NH-44 पर दो दिन भारी वाहनों पर रोक

जम्मू-कश्मीर सरकार की शीतकालीन राजधानी में वापसी के साथ ही दरबार मूव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। श्रीनगर से सरकारी कर्मचारियों के काफिलों के सुरक्षित आवागमन के लिए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सप्ताहांत में मालवाहक वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। सचिवालय और अन्य सरकारी कार्यालय सोमवार से अगले छह महीने के लिए जम्मू से सुचारू रूप से कार्य करेंगे।
जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी जम्मू के लिए श्रीनगर से सरकारी कर्मचारियों के काफिले रवाना होने लगे हैं और यह साल में दो बार होने वाली ‘दरबार मूव’ प्रक्रिया का हिस्सा है। सोमवार से अगले छह महीने तक सरकार जम्मू से कामकाज करेगी। इसके लिए शहर में तैयारियां की जा रही हैं।
अधिकारियों ने बताया कि सरकार के सालाना स्थानांतरण से पहले जम्मू में बड़े पैमाने पर सुधार और सौंदर्यीकरण के काम किए जा रहे हैं। सड़कों को नया रूप देने, उनके डामरीकरण और रंग-रोगन का काम लगभग पूरा हो चुका है। सरकार सर्दियों के छह महीने जम्मू से और गर्मियों के छह महीने श्रीनगर से कामकाज करती है।
अधिकारियों ने बताया कि सचिवालय के कर्मचारियों के काफिलों को श्रीनगर से जम्मू तक सुगमता से पहुंचाने के लिए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) पर शनिवार और रविवार को मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी लगाई गई है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने सर्दियों के मौसम 2026-27 के लिए श्रीनगर से जम्मू तक साल में दो बार होने वाली ‘दरबार मूव’ प्रक्रिया का आदेश दिया है। गर्मियों की राजधानी श्रीनगर में छह महीने तक कामकाज करने के बाद मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अन्य सरकारी विभागों के कार्यालय दो नवंबर से सर्दियों की राजधानी जम्मू में फिर से काम करना शुरू करेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि जम्मू में ‘दरबार मूव’ की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सरकार की वापसी से पहले प्रशासन सर्दियों की राजधानी को नया रूप देने में जुटा है। उन्होंने बताया कि सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ-साथ शहर में सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है।
जम्मू क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक तेजिंदर सिंह ने 24 अक्टूबर को यहां एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की थी। बैठक में ‘दरबार मूव’ के लिए सुरक्षा और समन्वय संबंधी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया। पहले ‘दरबार मूव’ के तहत कार्यालयों को स्थानांतरित करने और फाइलों तथा अन्य सामान को ले जाने के लिए कर्मचारियों को करीब एक सप्ताह की छुट्टी दी जाती थी।
हालांकि, अब फाइलें ई-गवर्नेंस प्रणाली में स्थानांतरित कर दी गई हैं और कागजी फाइलें नहीं ले जाई जातीं। इसलिए कार्यालय सोमवार को जम्मू में फिर से खुल जाएंगे। इस परंपरा की शुरुआत महाराजा गुलाब सिंह ने 1872 में दोनों क्षेत्रों के मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए की थी।
आजादी के बाद भी यह परंपरा जारी रही, ताकि कश्मीर और जम्मू दोनों क्षेत्रों को छह-छह महीने तक शासन-संबंधी सुविधाएं मिल सकें। वर्ष 2021 में उपराज्यपाल शासन के दौरान ई-कार्यालय व्यवस्था लागू होने और सालाना करीब 200 करोड़ रुपये की बचत का हवाला देते हुए राजधानी स्थानांतरित करने की यह परंपरा बंद कर दी गई थी। इस फैसले की आलोचना हुई थी।
खास तौर पर जम्मू के व्यापारिक समुदाय के कुछ वर्गों ने इसे दोनों क्षेत्रों के बीच एक महत्वपूर्ण आर्थिक और भावनात्मक कड़ी बताया था। नेशनल कॉन्फ्रेंस की उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने अक्टूबर 2025 में ‘दरबार मूव’ की परंपरा बहाल कर दी थी। यह फैसला चुनावी वादे को पूरा करने के तहत लिया गया था।
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