Congress का दावा, SIR के आंकड़ों से अमित शाह का झूठ उजागर हुआ

कांग्रेस ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत चिन्हित विदेशी नागरिकों के आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि 6 राज्यों में 10 करोड़ लोगों की जांच के बावजूद केवल 1,600 विदेशी मिले। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और इस प्रक्रिया को तत्काल निलंबित करने की मांग की।
कांग्रेस ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत अब तक चिन्हित किए गए विदेशी नागरिकों के आंकड़े को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि अब स्पष्ट हो गया है कि गृह मंत्री अमित शाह झूठ बोल रहे थे। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि गृह मंत्री ने कहा था कि एसआईआर का ‘3डी’ उद्देश्य घुसपैठियों की पहचान करना (डिटेक्ट), उनके नाम मतदाता सूची से हटाना (डिलीट) और उन्हें देश से बाहर भेजना (डिपोर्ट) है, ताकि मतदाता सूचियों को ‘‘शुद्ध’’ किया जा सके। रमेश ने सवाल किया, ‘‘एसआईआर ने वास्तव में क्या हासिल किया?’’ उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक, झारखंड, मेघालय, केरल, गोवा और मिजोरम में एसआईआर की प्रक्रिया से करीब 10 करोड़ लोग गुजरे, लेकिन विभिन्न देशों के केवल करीब 1,600 विदेशी नागरिकों की पहचान कर उनके नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि अन्य 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने इस संबंध में आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए क्योंकि निर्वाचन आयोग ने उनसे ऐसे आंकड़े एकत्र करने के लिए कहा ही नहीं था। रमेश ने आरोप लगाया, ‘‘इससे स्पष्ट है कि गृह मंत्री झूठ बोल रहे थे।’’ उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक में 99.7 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए और वहां 716 विदेशी नागरिकों की पहचान हुई, जिनमें से 545 नेपाल के नागरिक हैं। रमेश ने आरोप लगाया कि ये आंकड़े इस बात को साबित करते हैं कि एसआईआर का वास्तविक उद्देश्य बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को उनके संवैधानिक मतदान के अधिकार से वंचित करना था।
उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर ‘‘प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जोड़ी द्वारा रची गई साजिश’’ थी, जिसे मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ने ‘ईसीआईनेट’ समेत विभिन्न माध्यमों से लागू किया। कांग्रेस महासचिव ने यह मांग फिर उठाई कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना चाहिए, एसआईआर की प्रक्रिया निलंबित की जानी चाहिए और ‘ईसीआईनेट’ में व्यापक बदलाव किया जाना चाहिए।
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