लंदन में बोले CJI Surya Kant, सुप्रीम कोर्ट ने Digital Arrest धोखाधड़ी का स्वत संज्ञान लिया है

लंदन में 43वें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराध संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए अपराधों पर संसद के कानून का इंतजार किए बिना तुरंत संज्ञान लिया है। उच्चतम न्यायालय ने इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्यों को इसके व्यापक आकलन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए समय के साथ बदलती चुनौतियों के अनुरूप कानून व दंड तय करने पर बल दिया।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे उभरते अपराध पर संसद की ओर से कानून बनाए जाने का इंतजार करने के बजाय सक्रियता से प्रतिक्रिया दी है। प्रधान न्यायाधीश ने लंदन में आयोजित 43वें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराध संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने हाल में ‘‘डिजिटल अरेस्ट’’ धोखाधड़ी का स्वत: संज्ञान लिया था। उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराध में जालसाज वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी, न्यायिक अधिकारी या नौकरशाह बताकर लोगों को ठगते हैं।
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प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, ‘‘इसके जवाब में न्यायालय ने केंद्र व राज्यों को इस समस्या की व्यापकता का आकलन करने का निर्देश दिया और ऐसा अलग अपराध बनाने का आह्वान किया है, जिसमें नुकसान की गंभीरता के अनुरूप दंड का प्रावधान हो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है कि भारतीय न्यायपालिका उभरते धोखाधड़ी वाले अपराधों पर सक्रियता से प्रतिक्रिया देती है, न कि संसद द्वारा इस पर कदम उठाए जाने का इंतजार करती है।’’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए समय के साथ बदलती चुनौतियों को समझना और उनके अनुरूप प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।
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