कावेरी जल विवाद: कर्नाटक ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, तमिलनाडु को तय मात्रा से अधिक पानी दिया

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कर्नाटक सरकार ने उच्चतम न्यायालय को जानकारी दी है कि उसने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेश का पालन करते हुए तमिलनाडु के लिए तय सीमा से ज्यादा पानी छोड़ा है। राज्य के वकील ने बताया कि प्राधिकरण के 9,000 क्यूसेक के निर्देश के मुकाबले 31 अगस्त की सुबह तक 11,547 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय की है।

कर्नाटक सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने सोमवार तक तमिलनाडु के लिए तय मात्रा से अधिक पानी छोड़ा है और वह कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के 9,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने संबंधी निर्देश का पालन कर रही है। गत 25 अगस्त को सीडब्ल्यूएमए ने कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की उस सिफारिश को बरकरार रखा था, जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 9,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।

तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने पीठ को बताया कि राज्य ने प्राधिकरण के समक्ष पानी की पिछली कमी (बकाया) का मुद्दा उठाया था, लेकिन इस संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं किया गया। कर्नाटक सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा, आज की तारीख तक हम (सीडब्ल्यूएमए के निर्देश का) पालन कर रहे हैं। दीवान ने कहा कि 25 अगस्त के निर्देश के अनुसार 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना था और पहले दिन कर्नाटक ने 10,727 क्यूसेक पानी छोड़ा।

उन्होंने कहा, 30 अगस्त को 9,888 क्यूसेक पानी छोड़ा गया और आज सुबह आठ बजे तक 11,547 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। उन्होंने कहा, आज तक हमने तय मात्रा से अधिक पानी छोड़ा है। शीर्ष अदालत तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कर्नाटक को उसे तत्काल पानी छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

सुनवाई के दौरान वैद्यनाथन ने कहा कि पहले कर्नाटक को 12 अगस्त से 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था, लेकिन अब बिना किसी कारण इसे घटाकर 9,000 क्यूसेक कर दिया गया है। इस पर पीठ ने कहा, आप पानी चाहते हैं और वे (कर्नाटक) पानी छोड़ रहे हैं। सीडब्ल्यूएमए के फैसले को चुनौती दी जानी चाहिए।

दीवान ने कहा कि हाल में कर्नाटक ने कावेरी बेसिन में आने वाले कुछ जिलों समेत कई क्षेत्रों में गंभीर सूखे की घोषणा की है। वैद्यनाथन ने दलील दी, किसी प्राधिकरण को इस बात पर विचार करना चाहिए कि मेरे बकाया पानी की भरपाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। पीठ को बताया गया कि सीडब्ल्यूआरसी हर 15 दिन में स्थिति की समीक्षा कर रही है।

शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की और पक्षकारों से अद्यतन आंकड़े रिकॉर्ड पर रखने को कहा। अदालत ने यह भी कहा कि इस बीच हुई किसी भी अन्य प्रगति को रिकॉर्ड पर रखा जा सकता है। पीठ ने कहा कि सीडब्ल्यूआरसी हर 15 दिन में बैठक करके पक्षकारों को सुनने के बाद उचित आदेश जारी कर रहा है।

गत 24 अगस्त को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु सरकार से कहा था कि वह कर्नाटक से कावेरी जल का आनुपातिक हिस्सा छोड़े जाने से जुड़ी अपनी शिकायत सीडब्ल्यूएमए के समक्ष उठा सकती है। सीडब्ल्यूआरसी ने पहले कर्नाटक को 12 अगस्त से 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था, जिसे बाद में सीडब्ल्यूएमए ने बरकरार रखा था। गत 17 अगस्त को शीर्ष अदालत ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए कावेरी जल छोड़ने संबंधी सीडब्ल्यूएमए के निर्देश का पालन सुनिश्चित करने को कहा था।

तमिलनाडु सरकार ने पहले कहा था कि कम बारिश वाले वर्ष में उसे कावेरी जल का उसका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु राज्य सरकार ने तीन अगस्त को शीर्ष अदालत का रुख करते हुए कर्नाटक को तत्काल पानी छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। याचिका में राज्य सरकार ने दावा किया था कि सीडब्ल्यूआरसी की ओर से आवंटित और कर्नाटक द्वारा छोड़ी गई पानी की मात्रा बहुत कम है।

तमिलनाडु सरकार के अनुसार, 28 जुलाई को हुई सीडब्ल्यूआरसी की बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, 29 जुलाई से दो अगस्त के बीच बिलिगुंडलु में छोड़े गए पानी की मात्रा 158 से 550 क्यूसेक के बीच रही।

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