अशोक गहलोत बोले: Ram Mandir ट्रस्ट तुरंत भंग करो, देरी से बढ़ी नाराजगी

अशोक गहलोत ने राम मंदिर चंदे में कथित गड़बड़ी पर बीजेपी-आरएसएस की शुरुआती चुप्पी और जांच में देरी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज हटाए जाने के तुरंत बाद ही राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर देना चाहिए था, जिससे देशभर के श्रद्धालुओं में उपजी निराशा को कम किया जा सके।
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी के मामले में जांच एजेंसियों और राजनीतिक नेतृत्व की तरफ से देरी से की गई कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मंदिर के फंड का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट को सबूतों के साथ छेड़छाड़ का पता चलने के तुरंत बाद ही भंग कर दिया जाना चाहिए था। गहलोत ने इस मामले के सामने आने के शुरुआती दिनों में चुप्पी साधे रखने के लिए बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कड़ी आलोचना की।
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गहलोत ने सवाल किया कि कार्रवाई कब होगी? जब इस घटना की जानकारी पहली बार सामने आई, तो CCTV फुटेज डिलीट कर दिया गया था। तुरंत की जाने वाली कार्रवाई ट्रस्ट को भंग करना और जांच शुरू करना होनी चाहिए थी। बाद में, FIR दर्ज की गई, SIT बनाई गई और पहली गिरफ्तारी हुई। कई दिनों तक RSS और BJP की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। गहलोत ने आम नागरिकों के लिए मंदिर के भावनात्मक महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि कथित घोटाले से देशभर के श्रद्धालुओं में निराशा और नाराज़गी है। उन्होंने कहा कि लोगों ने दान दिया। जिन लोगों ने 10 रुपये दिए, वे भी उतना ही ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, जितना 1 लाख रुपये देने वाले। अगर सच जल्दी सामने आता है और कार्रवाई होती है, तभी जनता शांत होगी; वरना हालात और बिगड़ सकते हैं।
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कथित गबन के मामले ने उत्तर प्रदेश में ज़बरदस्त राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, जहाँ एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इन गड़बड़ियों की जाँच कर रही है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्ष के नेताओं ने राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग की है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर के फंड का गलत इस्तेमाल करने के दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई का वादा किया है। उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी गई SIT की शुरुआती रिपोर्ट में राम मंदिर में दान की गिनती के दौरान चोरी और हेराफेरी के शुरुआती सबूत मिले हैं। जाँच अभी भी जारी है।
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