Shehbaz Sharif सरकार की बढ़ेगी मुश्किल? Imran Khan को अस्पताल न भेजने पर PTI ने फिर खटखटाया SC का दरवाजा

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ANI
अभिनय आकाश । Aug 25 2026 4:30PM

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने यह याचिका 73 वर्षीय PTI संस्थापक की बहन उज़्मा खान के ज़रिए दाखिल की। ​​उन्होंने आरोप लगाया कि 20-21 अगस्त की रात को खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने के बजाय सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज ले जाया गया, जहाँ उनकी आँखों का एक प्रोसीजर और अन्य जाँचें की गईं।

पाकिस्तान के जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना ​​की याचिका फिर से दाखिल की। ​​पार्टी ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने खान को इलाज के लिए इस्लामाबाद के एक प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने के अदालत के 18 अगस्त के आदेश का उल्लंघन किया है। यह कदम तब उठाया गया जब कुछ आपत्तियों के साथ याचिका को वापस कर दिया गया था। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने यह याचिका 73 वर्षीय PTI संस्थापक की बहन उज़्मा खान के ज़रिए दाखिल की। ​​उन्होंने आरोप लगाया कि 20-21 अगस्त की रात को खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने के बजाय सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज ले जाया गया, जहाँ उनकी आँखों का एक प्रोसीजर और अन्य जाँचें की गईं। इसके बाद उन्हें वापस अदियाला जेल भेज दिया गया, जबकि अदालत का निर्देश था कि 16 सितंबर को अगली सुनवाई तक उन्हें इस्लामाबाद के अस्पताल में ही भर्ती रखा जाए। 

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सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी कारणों से उज़मा की याचिका वापस कर दी, लेकिन वकीलों का कहना है कि उन्होंने कोर्ट की चिंताओं और आपत्तियों को दूर कर लिया है और याचिका दोबारा दायर कर दी है। PTI चेयरमैन गोहर खान ने कहा कि एक आपत्ति यह थी कि याचिकाकर्ता ने सरकार पर लगाए गए आरोपों की सूची नहीं दी थी। उन्होंने कहा था, हम याचिका दोबारा दायर करेंगे। याचिका में उज़मा ने सुप्रीम कोर्ट से प्रतिवादियों के खिलाफ़ कोर्ट के आदेश की "जानबूझकर और ढिठाई से की गई अवहेलना और उल्लंघन" के लिए अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने की मांग की। प्रतिवादियों में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, कानून मंत्री आज़म नज़ीर तरार, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल हैं, जिनमें अदियाला जेल के सुपरिटेंडेंट साजिद बेग भी हैं। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का "पालन न करने और खुलेआम उल्लंघन" के कारण कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया जा रहा है। 

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इसमें कहा गया, प्रतिवादियों के अपने बयानों से यह साफ़ है कि 18 अगस्त के आदेश में दिए गए कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया गया था। इसमें आगे कहा गया कि खान को शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल न ले जाने से इसमें कोई शक नहीं रह जाता कि प्रतिवादियों ने जानबूझकर आदेश की अनदेखी और उल्लंघन किया है। साथ ही यह भी कहा गया कि उनके इस व्यवहार से सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को कमज़ोर किया गया है और कोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।

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