IRGC कमांडर Hossein Mohebbi बोले, US और सहयोगियों के खिलाफ लंबी लड़ाई की तैयारी

Iran
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अभिनय आकाश । Sep 21 2026 4:41PM

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा है कि अमेरिका के साथ टकराव खत्म नहीं हुआ है और वे लंबे युद्ध के लिए तैयार हैं। आईआरजीसी के अनुसार अमेरिका और इज़राइल अपने लक्ष्यों में नाकाम रहे हैं। साथ ही, अपनी सैन्य ताकत के बावजूद अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में भी विफल रहा है।

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ टकराव खत्म नहीं हुआ है और अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है, तो वे लंबे समय तक चलने वाले टकराव के लिए तैयार हैं। अल-आलम न्यूज़ नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में, IRGC के दूसरे ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहेब्बी ने कहा कि ईरानी सेना ने लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की तैयारी की है और अगर टकराव और ज़्यादा तनावपूर्ण दौर में पहुँचता है, तो वे जवाब देने के लिए तैयार रहेंगे। मोहेब्बी ने कहा कि हमारी नज़र में युद्ध तो युद्ध ही होता है; इसके अलग-अलग चरण हो सकते हैं, लेकिन युद्ध युद्ध है और यह खत्म नहीं हुआ है, यह जारी है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने खुद को लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए तैयार किया है; वे पहले भी तैयार थे और अब और भी बेहतर ढंग से तैयार हैं। यह कोई नया चरण नहीं है, लेकिन अगर किसी और चरण में हमें फिर से आक्रामकता का सामना करना पड़ता है, तो हम बिना किसी शक के तैयार हैं और अपना बचाव करेंगे। आईआरजीसी के प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ टकराव के दौरान अमेरिका, इज़राइल और उनके सहयोगी अपने मकसद में नाकाम रहे हैं। 

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मोहेब्बी ने कहा कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का मानना ​​है कि अमेरिका, ज़ायोनी शासन और उनके सहयोगियों के साथ हुई लड़ाई में अमेरिका नाकाम रहा है। उसकी हार ऐतिहासिक और शर्मनाक है, लेकिन उसमें इस हार को मानने और स्वीकार करने की हिम्मत नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका की नाकामी के इस आकलन से सैन्य और राजनीतिक विशेषज्ञ भी सहमत हैं, जिनमें खुद अमेरिका के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ज़ायोनी शासन की नाकामी ऐसी है जिसे सभी सैन्य और राजनीतिक विशेषज्ञ—यहाँ तक कि खुद अमेरिका के विशेषज्ञ भी—मानते हैं; वे ज़रा सा ध्यान देने पर ही इस नाकामी को देख, छू और महसूस कर सकते हैं। बेशक, उन्होंने यह बात मानी है, लेकिन इस मामले में अहम बात यह है कि कुछ लोग अमेरिका की नाकामी को तय लक्ष्यों को हासिल न कर पाने के तौर पर देखते हैं। चूँकि उनका कहना है कि अमेरिका उन लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाया जो मुख्य रूप से ज़ायोनी शासन ने तय किए थे, इसलिए अमेरिका नाकाम रहा है। 

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मोहेब्बी ने एक अहम बात रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बारे में कही। उन्होंने कहा कि अपनी सैन्य ताकत और नेविगेशन की आज़ादी व ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े घोषित लक्ष्यों के बावजूद, अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में नाकाम रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नाकामियों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से न खोल पाना है। दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना होने और इस क्षेत्र व दुनिया में अपनी मौजूदगी का मकसद ऊर्जा आपूर्ति और नेविगेशन की आज़ादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताने के बावजूद, इस युद्ध में यह साफ़ हो गया कि अमेरिका में सबसे पहले तो जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की क्षमता ही नहीं थी; उसने अपने सभी साधनों का इस्तेमाल किया, फिर भी वह ऐसा नहीं कर सका। यह एक नाकामी है। मोहेब्बी ने आगे कहा कि दूसरी बात, उसने अलग-अलग जलमार्गों में ऊर्जा आपूर्ति और नेविगेशन की आज़ादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने का नारा दिया था, और वह इस नारे को पूरा करने में नाकाम रहा। और इससे भी अहम बात यह है कि जो देश सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता था, वही खुद सुरक्षा के लिए खतरा बन गया।

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