US Donkey Route: भारतीयों से 60 लाख रुपये तक वसूली, ED ने खोला अवैध रास्तों का जाल

प्रवर्तन निदेशालय ने भारतीयों को अवैध रूप से अमेरिका भेजने वाले तीन डंकी रूट का पर्दाफाश किया है। यह खुलासा दिल्ली के एजेंट तरुण खोसला की गिरफ्तारी के बाद हुआ, जो इस नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार था। यह सिंडिकेट प्रति व्यक्ति 25 से 60 लाख रुपये वसूलकर लोगों को दक्षिण और मध्य अमेरिकी देशों के खतरनाक रास्तों से भेजता था।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तीन ऐसे अलग-अलग रास्तों का पता लगाया है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर एजेंटों द्वारा भारतीयों को 'डंकी रूट' के जरिए अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश कराने के लिए किया जाता था। यह जानकारी दिल्ली के एक टिकटिंग एजेंट की गिरफ्तारी के बाद सामने आई है, जो एक ऐसे नेटवर्क से जुड़ा था, जो इस यात्रा के लिए प्रति व्यक्ति 40 लाख रुपये तक वसूलता था। एजेंसी द्वारा पहचाने गए ये रास्ते दक्षिण और मध्य अमेरिका के कई देशों से होकर गुजरते हैं और अंत में अमेरिका-मेक्सिको सीमा तक पहुंचते हैं। यह जांच फरवरी 2025 में अमेरिका से 300 से अधिक भारतीय नागरिकों को वापस भेजे जाने (डिपोर्टेशन) से जुड़ी है। ये लोग कथित तौर पर मैक्सिको सीमा के रास्ते अवैध रूप से अमेरिका में दाखिल हुए थे। पहले रास्ते में यात्री हवाई जहाज से अल साल्वाडोर जाते थे, फिर सड़क मार्ग से मैक्सिको और तिजुआना पहुंचते थे, और वहां से अमेरिका में घुसने की कोशिश करते थे।
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ED के अनुसार, इस रास्ते के लिए हर यात्री से लगभग 35 लाख से 40 लाख रुपये लिए जाते थे। दूसरा रास्ता दुबई या अदीस अबाबा होते हुए गुयाना तक हवाई यात्रा से शुरू होता था। वहां से, यात्री सड़क मार्ग से ब्राजील, इक्वाडोर, कोलंबिया, पनामा के जंगलों, ग्वाटेमाला और मैक्सिको से होते हुए तिजुआना और अमेरिकी सीमा तक पहुंचते थे। एजेंसी के मुताबिक, इस रास्ते का खर्च प्रति व्यक्ति लगभग 25 लाख से 30 लाख रुपये था। जांच के दौरान वापस भेजे गए एक व्यक्ति ने तीसरे रास्ते के बारे में बताया। यह रास्ता गुयाना से शुरू होकर ब्राजील, बोलिविया, पेरू, कोलंबिया, पनामा, कोस्टा रिका, निकारागुआ, होंडुरास, अल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला और मैक्सिको से होते हुए अमेरिकी सीमा तक जाता था। जानकारी के अनुसार, एजेंसी ने 23 अक्टूबर को दिल्ली के एक एजेंट, तरुण खोसला को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA), 2002 के तहत हिरासत में लिया। खोसला अभी 30 अक्टूबर तक ED की हिरासत में हैं। खोसला से पूछताछ के आधार पर ED को पता चला है कि आरोपी ने कथित तौर पर यात्रा का इंतजाम किया था—जिसमें वीजा और हवाई टिकट शामिल थे—और यात्रियों को इन रास्तों से भेजने के लिए अन्य एजेंटों और स्थानीय मददगारों के साथ मिलकर काम किया था। ED ने बताया कि इन रास्तों में कई देशों से होकर गुजरना पड़ता था। यात्री अपनी आगे की यात्रा के लिए और अवैध रूप से सीमा पार करने के लिए स्थानीय मददगारों पर निर्भर रहते थे, जिन्हें 'डोंकर' कहा जाता है। ED के जालंधर जोनल ऑफिस ने खोसला को मनी लॉन्ड्रिंग की चल रही जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पंजाब और हरियाणा पुलिस द्वारा 'भारतीय न्याय संहिता', 2023 और 'इमिग्रेशन एक्ट', 1983 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज FIR के आधार पर की गई है।
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एजेंसी ने बताया कि जांच से पता चला है कि अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों को एजेंटों और बिचौलियों ने कानूनी तरीके से भेजने का झांसा दिया था। इसके बजाय, उन्हें दक्षिण और मध्य अमेरिका के खतरनाक और अवैध रास्तों से भेजा गया, जिसके लिए प्रति व्यक्ति 30 लाख से 60 लाख रुपये तक वसूले गए। आरोप है कि खोसला ने एक मुख्य सूत्रधार के रूप में काम किया। उसने पंजाब और हरियाणा के कई एजेंटों के साथ मिलकर काम किया, जो विदेश जाने के इच्छुक लोगों से पासपोर्ट और पैसे इकट्ठा करके उसे दिल्ली में सौंपते थे। आरोप है कि उसने गुयाना, सूरीनाम, इक्वाडोर और अल साल्वाडोर जैसे देशों के लिए वीजा और हवाई टिकट का इंतजाम किया, और यात्रियों को अमेरिका की सीमा की ओर भेजने का पूरा तालमेल बिठाया। एजेंसी ने बताया कि यात्रियों के लिए रास्ते तय करने और उनसे वसूली जाने वाली रकम तय करने में भी खोसला की अहम भूमिका थी।
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