तनाव के बावजूद हम निकाल रहे अधिक तेल, Donald Trump का नया बयान- US और Iran में कोई युद्ध नहीं

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अभिनय आकाश । Nov 7 2026 3:23PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ तनाव को युद्ध मानने से इनकार करते हुए कहा कि पिछले पांच महीनों में कोई हताहत नहीं हुआ और तेल उत्पादन बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि उनके हस्तक्षेप ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोककर पूरे क्षेत्र को बचाया। वहीं, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ चल रहे टकराव को "युद्ध नहीं" बताया है। उनका दावा है कि वाशिंगटन ने तेहरान के साथ निपटने में काफी प्रगति की है और अभी वे तनाव शुरू होने से पहले की तुलना में अधिक तेल निकाल रहे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि हमने ईरान के साथ काफी प्रगति की है। हम अब युद्ध से पहले की तुलना में अधिक तेल निकाल रहे हैं। यह कोई युद्ध नहीं है। इसे युद्ध कैसे कहा जा सकता है, जब पिछले पांच महीनों में किसी को कोई चोट नहीं आई, कोई मारा नहीं गया, या ऐसा कुछ भी नहीं हुआ? यह युद्ध नहीं है।" ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब ईरान को निशाना बनाने वाले अमेरिकी सैन्य अभियान की दिशा को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है, और साथ ही नए हवाई हमलों को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि व्हाइट हाउस में सक्रिय सैन्य विकल्पों पर विचार-विमर्श चल रहा है, लेकिन ट्रम्प का यह तर्क कायम है कि मौजूदा तनाव को युद्ध नहीं माना जा सकता। वहीं, तेहरान के साथ व्यापक टकराव क्षेत्र के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। 

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इसके अलावा, अमेरिकी नेता ने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता पूरी तरह से उनके प्रशासन द्वारा ईरान के परमाणु विकास को रोकने के लिए किए गए पिछले हस्तक्षेपों पर निर्भर थी। अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म के जरिए जारी एक बयान में, डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप को हर कोई मानता तो है, लेकिन जानबूझकर इसके बारे में बहुत कम बताया गया है। उन्होंने लिखा, "अगर मैंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोका होता, तो आज इज़राइल - और असल में पूरा मध्य पूर्व - मौजूद ही नहीं होता! कोई यह बात कहना नहीं चाहता, लेकिन सब जानते हैं कि यह सच है! ट्रम्प ने बार-बार ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे के खिलाफ किए गए अभियानों को एक बड़ी जीत के रूप में पेश किया है। 2025 और 2026 के दौरान, वाशिंगटन और इज़राइली सेनाओं ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था।

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फिर भी, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को हुए नुकसान का पूरा आकलन अभी भी स्पष्ट नहीं है। अक्टूबर में प्रकाशित 'कांग्रेसेशनल रिसर्च सर्विस' के एक आकलन में बताया गया है कि हथियारों के स्वदेशी निर्माण की क्षमता पर वास्तव में क्या असर पड़ा है, यह अभी भी तय नहीं है। इस मूल्यांकन में पुरानी खुफिया जानकारी पर बनी आम सहमति का भी जिक्र है, जिसके अनुसार तेहरान ने परमाणु उपकरण बनाने से परहेज किया था। वहीं, ईरानी अधिकारी लगातार परमाणु हथियार विकसित करने की अपनी किसी भी मंशा से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि उनके देश का परमाणु ढांचा पूरी तरह से नागरिक कार्यों (शांतिपूर्ण उद्देश्यों) के लिए है।

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