Next Generation Corvette से लैस होगी Indian Navy, ₹53,866 करोड़ की डील से मिलेगा रोजगार

Defence
ANI
अभिनय आकाश । Nov 2 2026 4:59PM

रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए आठ नेक्स्ट जनरेशन कोरवेट निर्माण हेतु जीआरएसई और जीएसएल के साथ 53,866.50 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। इस स्वदेशी परियोजना के तहत जीआरएसई पांच तथा जीएसएल तीन युद्धपोत बनाएगा। अत्याधुनिक हथियारों से लैस ये पोत नौसेना की मारक क्षमता को मजबूत करेंगे और आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण को बड़ा बढ़ावा देंगे।

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए आठ युद्धपोत खरीदने के वास्ते गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंध किए हैं। इस अनुबंध के तहत, मंत्रालय सरकारी स्वामित्व वाली इन दो कंपनियों से भारतीय नौसेना के लिए आठ 'नेक्स्ट जनरेशन कोरवेट' (NGC) हासिल करेगा। इसमें बताया गया है कि अनुबंध के अनुसार, GRSE पांच कोरवेट बनाएगा, जबकि GSL बाकी तीन कोरवेट का निर्माण करेगा। बयान में आगे कहा गया है, यह परियोजना भारत की स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह अपनी तरह की पहली परियोजना है, जिसमें जहाजों को भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किया जाएगा और एक प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से चुने गए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) द्वारा इनका निर्माण किया जाएगा। 

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NGCs अत्याधुनिक क्षमताओं से लैस होंगे


NGCs अत्याधुनिक क्षमताओं से लैस होंगे, जिनमें उन्नत मिसाइलें, हथियार और सेंसर सूट शामिल हैं। इससे ये हवा, सतह और पानी के भीतर—तीनों क्षेत्रों में मिशन को अंजाम देने में सक्षम होंगे। इन जहाजों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमताएं काफी बढ़ जाएंगी। इससे समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, एंटी-सरफेस और एंटी-सबमरीन युद्ध अभियान, तटीय रक्षा को मजबूत करने, तटीय क्षेत्रों में युद्ध अभियानों, और समुद्री उपस्थिति व निगरानी मिशनों को चलाने में मदद मिलेगी।

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नौसैनिक तकनीक को बड़ा बढ़ावा


भारत का 'नेक्स्ट जनरेशन कोरवेट' (NGC) प्रोजेक्ट, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs), निजी शिपयार्डों और MSMEs सहित भारतीय औद्योगिक साझेदारों के बीच सहयोग को मजबूत करके, भारत के स्वदेशी जहाज निर्माण इकोसिस्टम को बड़ा बढ़ावा देगा। इन जहाजों के निर्माण से अगले दस वर्षों में शिपयार्डों में लगभग 72 लाख 'पर्सन-डेज' (कार्य-दिवस) और सहायक उद्योगों व MSMEs में 460 लाख 'पर्सन-डेज' के बराबर रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। 'मेड-इन-इंडिया' सामग्री और उपकरणों, स्वदेशी तकनीकों, तथा भारतीय कौशल और विशेषज्ञता को बढ़ावा देकर, यह प्रोजेक्ट रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। साथ ही, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के प्रति प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।

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