पलटा चीन, भारत को भेजेगा 1 लाख टन भयंकर माल

भारत ने हाल ही में यूरिया के लिए एक बड़ा टेंडर निकाला था। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस पूरे टेंडर का लगभग 70% हिस्सा अकेले चीन से आ रहा है। यह कोई छोटी-मोटी शिपमेंट नहीं है।
चीन दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य उत्पादक देश है, अब भारत को 12 लाख टन यानी 1.2 मिलियन टन यूरिया भेजने वाला है। वही चीन जिसने कुछ महीनों पहले एक्सपोर्ट पर ताला लगा दिया था। आखिर वो भारत के लिए अपनी तिजोरी क्यों खोल रहा है? दरअसल सबसे पहले इस खबर की गहराई को समझिए। भारत ने हाल ही में यूरिया के लिए एक बड़ा टेंडर निकाला था। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस पूरे टेंडर का लगभग 70% हिस्सा अकेले चीन से आ रहा है। यह कोई छोटी-मोटी शिपमेंट नहीं है। 24 सितंबर तक चीन के बंदरगाहों से यूरिया से लदे जहाज भारत के लिए रवाना होने लगेंगे। भले ही सरकार अभी इस पर चुप्पी साधे हुए है लेकिन हकीकत तो यह है कि भारत की रबी फसल की कामयाबी के पीछे अब चीनी खाद का एक बड़ा रोल होने वाला है।
इसे भी पढ़ें: Tibet में Isha Foundation के 77 तीर्थयात्री बाढ़ के बाद लापता, दूतावासों से संपर्क
चीन ने यूटर्न क्यों लिया?
अप्रैल के महीनों को याद कीजिए जब मध्यपुर में युद्ध के बाद यूरिया की कीमतें आसमान छू रही थी। ईरान से आने वाली सप्लाई कट गई थी। उस वक्त चीन ने अपने हाथ पीछे खींच लिए थे ताकि उसके अपने किसानों को कमी ना हो। लेकिन अब बीजिंग ने अपना एक्सपोर्ट कोटा बढ़ाकर 5.5 मिलियन टन कर दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्लोबल मार्केट में गिरती कीमतों और भारत जैसे बड़े ग्राहक को ना खोने के डर से चीन ने अपनी पकड़ ढीली की है। आपको जानकर गर्व होगा कि भारत जितना यूरिया इस्तेमाल करता है, उतना अमेरिका और ब्राजील मिलकर भी नहीं करते हैं। हम दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक हैं। गेहूं, चीनी, कपास में हमारा कोई मुकाबला नहीं है। लेकिन इस ताकत को बनाए रखने के लिए हमें खाद चाहिए।
इसे भी पढ़ें: कभी भी फट सकती है झील, नेपाल में तबाही के बीच चीन की नई चेतावनी
भारत सरकार अरबों रुपए की सब्सिडी देती है ताकि हमारे किसानों को यूरिया की कमी ना हो और चीन से आने वाला ये 1.2 मिलियन टन यूरिया उसी कड़ी का हिस्सा है जो हमारी फूड सिक्योरिटी को पक्का करेगा। यहां एक और बड़ा सवाल यह है कि क्या हम चीन पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं? देखिए सच यह है कि भारत अपनी आत्मनिर्भरता बढ़ा रहा है। हमारे नए यूरिया प्लांट शुरू हो रहे हैं। जब तक हम पूरी तरह सेल्फ डिपेंडेंट नहीं हो जाते हैं तब तक ग्लोबल मार्केट में अपनी पोजीशन का इस्तेमाल करके चीन जैसे देशों से सामान लेना हमारी समझदारी है। यह डील भारत के दबाव और चीन की आर्थिक जरूरत दोनों का मेल है।
अन्य न्यूज़














