चीन में दो विदेशी खुफिया एजेंसियों को गोपनीय सैन्य जानकारी देने वाला रक्षा अधिकारी गिरफ्तार

चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय ने संवेदनशील सैन्य दस्तावेज विदेशी एजेंटों को लीक करने के आरोप में अपनी एक रक्षा कंपनी के अधिकारी झांग को पकड़ा है। आरोपी ने पैसों के लालच में आकर दो अलग-अलग देशों के खुफिया अधिकारियों को चीन के हथियारों और सैन्य आयात से जुड़े गुप्त दस्तावेज मुहैया कराए थे।
के जे एम वर्मा बीजिंग, 31 अगस्त चीन की एक रक्षा कंपनी के एक अधिकारी को दो देशों की खुफिया एजेंसियों को संवेदनशील रक्षा संबंधी जानकारी लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। चीन की शीर्ष जासूसी रोधी एजेंसी ने सोमवार को यह जानकारी दी। हांगकांग स्थित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की खबर के अनुसार, किसी चीनी नागरिक को एक साथ कई अलग-अलग विदेशी खुफिया एजेंसियों द्वारा भर्ती किए जाने का सार्वजनिक रूप से सामने आया मामला बेहद दुर्लभ है।
चीन में जासूसी, खासकर सैन्य गोपनीय सूचनाओं से जुड़े मामलों में मृत्युदंड तक का प्रावधान है। चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय (एमएसएस) ने सोमवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकाशित एक लेख में आरोपी की पहचान केवल उसके उपनाम ‘झांग’ के रूप में की है। रिपोर्ट में उन दोनों देशों के नाम नहीं बताए गए हैं, बल्कि उन्हें केवल ‘‘देश ए’’ और ‘‘देश बी’’ के रूप में संदर्भित किया गया है।
इसमें चीनी कंपनी का नाम या मामले की सटीक समयसीमा भी नहीं बताई गई है। मंत्रालय के अनुसार, झांग ने विदेश में कई वर्षों तक पढ़ाई करने के बाद कई विदेशी भाषाओं में दक्षता हासिल की थी। चीन लौटने के बाद वह अपने नियोक्ता के बीच काफी सम्मानित था और रक्षा उपकरणों का व्यापार करने वाली कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार को संभालता था।
मंत्रालय ने बताया कि झांग को कई साल पहले एक राजनयिक समारोह में ‘‘देश ए’’ की एक विदेशी जासूसी एजेंसी ने अपने संपर्क में लिया था। इस दौरान उस देश के ‘‘लुकास’’ नामक राजनयिक ने उससे संपर्क जानकारी साझा की। कुछ महीने बाद लुकास ने झांग से कुछ तकनीकी दस्तावेजों का अनुवाद करने को कहा और इसके बदले उसे कुछ सौ अमेरिकी डॉलर दिए।
इसके बाद अनुवाद के अनुरोध लगातार बढ़ते गए और इसके बदले मिलने वाली रकम भी बढ़ गई। मंत्रालय के अनुसार, बाद में लुकास ने चीन के सैन्य आयात और चीनी रक्षा कंपनियों के बीच काम के बंटवारे से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां मांगनी शुरू कर दीं। रिपोर्ट में कहा गया कि झांग को जब यह एहसास हो गया कि लुकास संभवतः खुफिया अधिकारी है, तब भी उसने उसके साथ सहयोग जारी रखा।
समय के साथ उसने मौखिक जानकारी और भौतिक दस्तावेज उपलब्ध कराए और बदले में उसे हजारों डॉलर मिले। मंत्रालय के अनुसार, जब झांग ‘‘देश ए’’ के संपर्क में था, उसी दौरान विदेश यात्रा के दौरान ‘‘देश बी’’ के खुफिया एजेंटों ने भी उसे निशाना बनाया। रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘देश बी’’ के एक दूतावास अधिकारी ने उसे अपनी सहायक ‘‘सारा’’ से मिलवाया, जिसने झांग के साथ करीबी व्यक्तिगत संबंध बनाए।
बाद में उसने अपनी पहचान विदेशी खुफिया एजेंट के रूप में उजागर की और झांग से संवेदनशील जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। मंत्रालय ने बताया कि सारा ने आर्थिक लाभ का लालच देने के अलावा झांग से यह भी कहा कि अगर वह पकड़ा गया तो ‘‘देश बी’’ उसे वहां से निकाल लेगा। इसके बाद झांग ने चीनी हथियारों से जुड़े गोपनीय दस्तावेज उपलब्ध कराए।
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