450 घातक रॉकेट लॉन्चर से सेना मचाएगी तबाही, LAC पर मचेगा हाहाकार

पुराने लॉन्चर को उठाकर पहाड़ों पर चढ़ना किसी सजा से कम नहीं था। मार्क 3 का वजन लगभग 10 किलो था। लेकिन मार्क चार सिर्फ 7 कि.ग्र. का है। एक सैनिक के लिए 3 किग्र वजन कम होने का मतलब है ज़्यादा गोलियां ले जाने की क्षमता और तेज गति।
7 किलो वजन, 800 मीटर की रेंज और दुश्मन का नामोनिशान मिटाने की शक्ति। आधुनिक युद्ध अब जज्बे के साथ-साथ सही तकनीक से जीते जाते हैं और भारतीय सेना ने अब वह तकनीक साबित हासिल करने का मन बना लिया है जो पलक झपकते ही दुश्मन के बंकरों को कब्रिस्तान में बदल देगी। भारत सरकार ने 450 यूनिट कार्ल गुस्टाफ मार्क चार रॉकेट लांचर के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी आरएफपी जारी कर दिया है। यह वही हथियार है जिसका नाम सुनते ही दुश्मन की बख्तरबंद गाड़ियों के ड्राइवर रास्ता बदल देते हैं। दरअसल भारतीय सेना दशकों से काल गुस्टाफ का इस्तेमाल कर रही है। हमने इसका मार्क 2 और मार्क 3 देखा है। लेकिन मार्क चार क्यों खास है? इसकी सबसे बड़ी वजह है वजन का खेल। पुराने लॉन्चर को उठाकर पहाड़ों पर चढ़ना किसी सजा से कम नहीं था। मार्क 3 का वजन लगभग 10 किलो था। लेकिन मार्क चार सिर्फ 7 कि.ग्र. का है। एक सैनिक के लिए 3 किग्र वजन कम होने का मतलब है ज़्यादा गोलियां ले जाने की क्षमता और तेज गति।
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दूसरा पॉइंट है लंबाई में छोटा। इसकी लंबाई भी कम की गई है। 1 मीटर से कम जिससे इसे घने जंगलों या फिर तंग बंकरों से चलाना आसान हो गया है। तीसरा पॉइंट है फायरिंग रेंज। इसकी बैरल लाइफ 1500 राउंड की है। यानी यह सालों साल बिना किसी खराबी के सेना की सेवा करेगा। मार्क चार सिर्फ एक पाइप नहीं यह एक स्मार्ट वेपन है। इसमें ऐसे सेंसर्स और साइटिंग सिस्टम लगे हैं जो इसे दुनिया के किसी भी अन्य कंधे से दागे जाने वाले हथियार से बेहतर बनाते हैं। इसमें प्रोग्रामेबल गोलियां दागी जा सकती है। यानी आप तय कर सकते हैं कि गोला दीवार से टकराकर फटेगा या दीवार को भेदकर अंदर जाकर फटेगा। 350 मीटर पर चलते हुए टैंक को उड़ाना हो या 800 मीटर पर बैठे स्नाइपर को इसका निशाना अचूक है। इसमें थर्मल साइड और नाइट विजन लगाने की सुविधा है जिससे रात के अंधेरे में भी भारतीय सेना काल बनकर टूटेगी। भारत की सीमाएं दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण सीमा है। लद्दाख में पारा -20° चला जाता है। जहां इंजन जम जाते हैं और हथियार काम करना बंद कर देते हैं।
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सेना ने आरएफपी में स्पष्ट शर्त रखी है कि हथियार को इन दोनों चरम स्थितियों में 100% सटीक होना होगा। इसका मतलब है कि चाहे गलवान की बर्फीली घाटी हो या कक्ष का रेगिस्तान कालगुफ मार्क चार हर जगह भारत का कवच बनेगा। यह इनफेंट्री मॉडर्नाइजेशन का वो हिस्सा है जो सीधे फ्रंट लाइन सोल्जर के हाथ में सबसे घातक शक्ति दे रहा है।
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