1 लाख करोड़ की धांसू डील, UAE के साथ मिलकर Adani Group ने खोल दिया खजाना!

भारत की अडानी ग्रुप और यूएई की इंडस्ट्रियल होल्डिंग कंपनी यानी आईएससी ने ओसा में करीब 11.5 अरब डॉलर यानी लगभग $1 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश करने का फैसला किया है। यह भारत के मेटल सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश माना जा रहा है। इस परियोजना के लिए दोनों कंपनियों ने 50-50% हिस्सेदारी वाला संयुक्त उदम बनाया है। यानी निवेश भी बराबर होगा और भविष्य की कमाई में भी दोनों देशों की बराबर भागीदारी रहेगी।
जब दुनिया में कई तरह के बवाल चल रहे हैं, जंग चल रहे हैं और यहां तक कि मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। उस बीच भारत और उसके दोस्त देश यूएई ने मिलकर ऐसा निवेश किया है जो आने वाले कई दशकों तक दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और यही वजह है कि इस डील को सिर्फ एक इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट नहीं बल्कि एक रणनीतिक साझेदारी के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल भारत की अडानी ग्रुप और यूएई की इंडस्ट्रियल होल्डिंग कंपनी यानी आईएससी ने ओसा में करीब 11.5 अरब डॉलर यानी लगभग $1 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश करने का फैसला किया है। यह भारत के मेटल सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश माना जा रहा है। इस परियोजना के लिए दोनों कंपनियों ने 50-50% हिस्सेदारी वाला संयुक्त उदम बनाया है। यानी निवेश भी बराबर होगा और भविष्य की कमाई में भी दोनों देशों की बराबर भागीदारी रहेगी।
इसे भी पढ़ें: Instagram पर CSAM Ads: BBC रिपोर्ट पर एक्शन में सरकार, Meta के अधिकारी होंगे तलब
दरअसल उड़ीसा में एक विशाल इंटीग्रेटेड एलुमिनियम कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। इसमें 40 लाख टन सालाना क्षमता की एलुमिनिया रिफाइनरी होगी। 20 लाख टन क्षमता का एलुमिनियम स्नेटर बनाया जाएगा। 4000 मेगावाट का कैप्टिक पावर प्लांट होगा और साथ ही डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग पार्क भी तैयार किया जाएगा। यानी यह जो निवेश दोनों देश मिलकर कर रहे हैं वो उड़ीसा में होगा और यहां सिर्फ एलुमिनियम नहीं बनेगा बल्कि उससे जुड़ी कई दूसरी इंडस्ट्री भी विकसित होगी। आसान भाषा में कहें तो यह पूरा एक इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम होगा। बता दें मेटल सेक्टर में यह अब तक का सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि इतनी बड़ी रकम आखिर एक ही प्रोजेक्ट में क्यों लगाई जा रही है? इसकी वजह भारत की बढ़ती जरूरतें हैं। देश में तेजी से रेलवे का विस्तार हो रहा है। मेट्रो नेटवर्क बढ़ रहा है। सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट लग रहे हैं। इलेक्ट्रिक गाड़ियों का उत्पादन बढ़ रहा है और रक्षा क्षेत्र में घरेलू निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। इन सभी क्षेत्रों में एलुमिनियम की बढ़ती जरूरत पड़ती है। यह हल्का भी होता है। मजबूत भी होता है और लंबे समय तक टिकाऊ भी रहता है। इसलिए आने वाले वर्षों में इसकी मांग और बढ़ने वाली है।
इसे भी पढ़ें: Share Market में लगातार तीसरे दिन बहार, IT Stocks की चमक से Sensex 77,700 के पार
फिलहाल भारत में एलुमिनियम की खपत उत्पादन से ज्यादा है। देश में हर साल करीब 55 लाख टन एलुमिनियम की जरूरत होती है। जबकि घरेलू उत्पादन लगभग 42 लाख टन के आसपास हैं। यानी मांग पूरी करने के लिए आयात करना पड़ता है। इस नई परियोजना के शुरू होने के बाद भारत की उत्पादन क्षमता में लगभग 50% तक की बढ़ोतरी हो जाएगी। इसका मतलब है कि भारत आयात पर कम निर्भर होगा और दुनिया के बड़े एलुमिनियम उत्पादकों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा। यानी कि यह कोई छोटा-मोटा प्रोजेक्ट नहीं है। यूएई के साथ मिलकर अडानी ग्रुप यहां पर बकायदा एक इंडस्ट्री तैयार कर रहा है। एक तो इससे मेटल सेक्टर को बूस्ट मिलेगा। और एक और बड़ी बात जो एलुमिनियम हम बाहर से मंगाया करते थे इस इंडस्ट्री के आने से उसमें भी हमें कटौती देखने को मिलेगी। यानी कि जो निर्भरता हमारी विदेशों पर होती थी वह भी कम होगी और भारत में इसकी खपत और ज्यादा बढ़ेगी।
इसे भी पढ़ें: Pakistan की 'हाथ काटने' की धमकी पर MEA का करारा जवाब, कहा- पहले Terrorism बंद करो
अब सवाल आता है कि इस प्रोजेक्ट के लिए हमने ओसा को ही क्यों चुना? देखिए इसका जवाब काफी आसान है। उड़ीसा के पास भारत के कुल बॉक्साइट भंडार का आधे से ज्यादा हिस्सा है। बॉक्साइट वही खनिज है जिसे एलुमिनियम तैयार किया जाता है। यानी कच्चा माल यहीं उपलब्ध है। इसके अलावा राज्य पहले से ही भारत के कुल कच्चे एलुमिनियम उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है। अडानी ग्रुप का धामरा पोर्ट भी इसी इलाके के पास है। जिससे कच्चा माल लाने और तैयार उत्पाद को देश विदेश भेजने में काफी आसानी होगी। इसीलिए लागत भी कम होगी और उत्पादन भी ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेगा।
अन्य न्यूज़














