The Devil Wears Prada 2 Movie Review: बदलते दौर में मिरांडा प्रीस्टली का नया और संवेदनशील अवतार

लगभग दो दशकों के लंबे इंतज़ार के बाद, फैशन और कॉर्पोरेट जगत की सबसे चर्चित फिल्म का सीक्वल 'द डेविल वियर्स प्राडा 2' पर्दे पर लौट आया है। जहाँ पहली फिल्म ने फैशन की चकाचौंध के बीच सत्ता और महत्वाकांक्षा की कड़वी सच्चाई दिखाई थी।
लगभग दो दशकों के लंबे इंतज़ार के बाद, फैशन और कॉर्पोरेट जगत की सबसे चर्चित फिल्म का सीक्वल 'द डेविल वियर्स प्राडा 2' पर्दे पर लौट आया है। जहाँ पहली फिल्म ने फैशन की चकाचौंध के बीच सत्ता और महत्वाकांक्षा की कड़वी सच्चाई दिखाई थी, वहीं यह सीक्वल डिजिटल युग, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के खतरों और पुराने किरदारों के आत्म-मंथन की एक दिलचस्प दास्तां पेश करता है।
कहानी: 'रनवे' की दुनिया में डिजिटल बदलाव
कहानी एंडी सैक्स के इर्द-गिर्द घूमती है। कहीं और सालों तक एक शानदार करियर बनाने के बाद, वह एक बार फिर 'रनवे' मैगज़ीन की दुनिया में वापस खिंची चली आती है। यह उसकी अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि ज़रूरत के चलते होता है; इसी वजह से उसे एक ऐसे माहौल में काम पर लौटना पड़ता है, जहाँ उसके जाने के बाद से काफ़ी कुछ बदल चुका है। इस किरदार का यह नया रूप—जिसमें वह एक समझदार, लेकिन कुछ हद तक अनिश्चित महिला के तौर पर नज़र आती है—फ़िल्म को एक दिलचस्प मोड़ देता है। जो दुनिया कभी सिर्फ़ प्रिंट मीडिया तक सीमित थी, अब उसकी जगह डिजिटल मीडिया ले रहा है, और पुरानी-मानी-जानी मैगज़ीनें खुद को खतरे में महसूस कर रही हैं।
इसी माहौल में नज़र आती है मिरांडा प्रीस्टली, जो पहले के मुकाबले अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ उसे समझ नहीं आ रहा कि क्या करे। अब वह पहले की तरह किसी चुटीले ताने या तीखी नज़र से इन खतरों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती, बल्कि उसे इन वास्तविकताओं को स्वीकार करना ही होगा। उसे अपनी पहचान से समझौता किए बिना, इस नए माहौल में ढलने का कोई न कोई रास्ता ढूँढ़ना होगा—और फ़िल्म इसी पहलू को गहराई से टटोलने की कोशिश करती है। इस कहानी में एमिली के साथ का तनाव भी शामिल है, जो खुद भी कहानी के दौरान काफ़ी बदलती है। इसके बावजूद, कहानी पर कई छोटी-छोटी उप-कहानियों (subplots) का बोझ कुछ ज़्यादा ही लगता है; इनमें कॉर्पोरेट और निजी, दोनों तरह के मुद्दे शामिल हैं, जो उम्मीद के मुताबिक पूरी तरह से उभरकर सामने नहीं आ पाते। हालाँकि फ़िल्म का मूल विचार काफ़ी दिलचस्प है, लेकिन इसके प्रस्तुतीकरण (execution) में कुछ कमियाँ ज़रूर नज़र आती हैं।
अभिनय: कलाकारों ने फूँकी जान
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके पुराने कलाकारों की वापसी और उनका परिपक्व अभिनय है:
मेरिल स्ट्रीप: मिरांडा के रूप में उन्होंने एक ऐसी सूक्ष्म कमजोरी (vulnerability) दिखाई है, जो पहले कभी नहीं देखी गई। वह अब केवल एक 'बॉस' नहीं, बल्कि एक इंसान के रूप में उभरती हैं।
ऐनी हैथवे: एंडी के रूप में ऐनी ने परिपक्वता और पुरानी असुरक्षाओं के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाया है।
एमिली ब्लंट और स्टेनली टुची: एमिली के जानदार दृश्य और स्टेनली टुची की सहज मौजूदगी फिल्म को एक मजबूत आधार देती है।
लेखन और निर्देशन: धारदार संवादों की कमी?
निर्देशन के स्तर पर फिल्म पुरानी यादों (nostalgia) और भविष्य की चुनौतियों के बीच झूलती रहती है। फिल्म में वह 'ड्राई विट' (सूखा हास्य) तो है, लेकिन संवादों में पहली फिल्म जैसी तीखापन और धार की थोड़ी कमी खलती है। पटकथा पिछली बार के मुकाबले कुछ नरम है। हालाँकि, यह फिल्म फैशन की दुनिया की आलोचना करने के बजाय, अधिक सहानुभूतिपूर्ण और सोच-विचार वाला नजरिया अपनाती है।
तकनीकी पक्ष और संगीत
तकनीकी रूप से फिल्म ऊंचे मानकों पर खरी उतरती है:
सिनेमैटोग्राफी और कॉस्ट्यूम: फैशन की दुनिया का तनाव और चकाचौंध पर्दे पर बखूबी दिखता है, हालांकि यह पहली फिल्म जितना 'आइकॉनिक' नहीं बन पाया है।
साउंडट्रैक: फिल्म का संगीत इसे आधुनिक एहसास देता है। विशेष रूप से लेडी गागा की उपस्थिति और महिलाओं पर केंद्रित उनका गीत दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ता है।
एडिटिंग: फिल्म की गति पहले घंटे के बाद थोड़ी धीमी पड़ती है और कुछ सब-प्लॉट्स (उप-कहानियां) कहानी पर बोझ जैसी लगती हैं।
निष्कर्ष: क्या यह देखने लायक है?
'द डेविल वियर्स प्राडा 2' एक ऐसी फिल्म है जो पुरानी यादों का जश्न मनाती है और साथ ही आज के 'डिजिटल संकट' पर तीखा प्रहार करती है। यह पहली फिल्म की तरह शायद क्रांतिकारी न हो, लेकिन मेरिल स्ट्रीप और ऐनी हैथवे की जुगलबंदी के लिए इसे देखना एक सुखद अनुभव है।
रेटिंग: 3.5/5
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