धोनी का टीम इंडिया के साथ जुड़ना जीत की गारंटी से कम नहीं, आंकड़े बता रहे माही क्यों हैं महत्वपूर्ण

15 साल तक मैदान के भीतर अपना लोहा मनवाने वाले धोनी को मेंटर की भूमिका में देखना काफी दिलचस्प होगा। हालांकि कप्तान विराट कोहली और मुख्य कोच रवि शास्त्री उनका इस्तेमाल कैसे करते हैं यह तो उनकी समझ पर आधारित होगा।
दुबई। चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) को चौथी बार इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का खिताब दिलाने के बाद महेंद्र सिंह धोनी ने अब टी20 विश्व कप में भारतीय टीम के लिए रणनीतियां बनाना शुरू कर दिया है। धोनी भारतीय टीम के न सिर्फ मेंटर हैं बल्कि वो खिलाड़ियों के अच्छे दोस्त, गुरू और प्रेरणास्त्रोत हैं। अभ्यास मुकाबले में जहां भारतीय टीम के 11 खिलाड़ी मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के पसीने छुड़ा रहे थे वहीं धोनी मैदान के बाहर विकेटकीपर ऋषभ पंत को गुर सिखा रहे थे।
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15 साल तक मैदान के भीतर अपना लोहा मनवाने वाले धोनी को मेंटर की भूमिका में देखना काफी दिलचस्प होगा। हालांकि कप्तान विराट कोहली और मुख्य कोच रवि शास्त्री उनका इस्तेमाल कैसे करते हैं यह तो उनकी समझ पर आधारित होगा।
धोनी ने की 200 मुकाबलों की अगुवाईइसे भी पढ़ें: Warm-Up मैच के बाद भारत-पाक की टीमें कर रहीं महामुकाबले की तैयारी, आंकड़ों में जानें कौन किस पर है भारी
आईसीसी मुकाबलों में धोनी की रणनीति रही कारगर
पहली बार धोनी की अगुवाई में भारत ने साल 2007 का टी20 विश्व कप खेला था और फिर वो हुआ जिसकी किसी को भी उम्मीद नहीं थी। भारत ने टी20 विश्व कप का खिताब उठाया। इसके बाद साल 2011 विश्व कप में भी धोनी की रणनीति कारगर साबित हुई उन्होंने विजयी छक्के के साथ श्रीलंका के खिलाफ खेले गए फाइनल मुकाबले को जीत लिया और कपिल देव के बाद विश्व कप खिताब उठाने वाले कप्तान बने। इसलिए धोनी की रणनीति भारतीय खेमे के लिए महत्वपूर्ण हैं।अन्य न्यूज़















