2 लाख महिलाओं से रेप, 3,000,000 की हत्या, आज ही के दिन हुआ ऐसा नरसंहार, कांप उठी थी दुनिया, PM ने किया चौंकाने वाला खुलासा

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अभिनय आकाश । Mar 25 2026 12:58PM

बांग्लादेश में 25 मार्च 1971 को नरसंहार दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सर्चलाइट के नाम पर तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान ने निहत्थे लोगों का कत्लेआम किया था। 2017 को शेख हसीना की सरकार के कार्यकाल में बांग्लादेश की संसद ने सर्वसम्मति से इसे नरसंहार दिवस घोषित किया था।

"हेलो अब्दुल्ला मैं गंधर्व बोल रहा हूं। उधर से आवाज आती है गंधर्व तुम कहां हो। जवाब मिलता है मैं ढाका के बाहर खड़ा हूं और तुम्हारे सरेंडर का इंतजार कर रहा हूं।" यह दो दोस्तों के बीच की बातचीत थी। दो कोर्समेट जिन्होंने एक साथ आर्मी जवाइन की एक ढाका में पाकिस्तानी आर्मी के हेड क्वार्टर में था और दूसरा ढाका के बाहर अपनी 3000 सैनिकों की टुकड़ी के साथ मीरपुर ब्रिज पर। यह एक विजय योद्धा और हारे हुए जनरल के बीच की बातचीत थी। ये भारतीय सेना के मेजर जनरल गंधर्व सिंह नागरा और पाकिस्तान आर्मी के लेफ्टिनेंट जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी के बीच की बातचीत थी। थोड़ी देर बाद मेजर जनरल नागरा, जनरल नियाजी के ऑफिस में थे। भारतीय सैन्य अधिकारियों के सामने पाकिस्तानी सेना के लेफ्टिनेंट जनरल नियाजी रो रहे थे पाकिस्तानी सेना ने घुटने टेक दिए भारतीय सेना के ईस्टर्न कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा और चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल जेएफ आर जैकब ढाका पहुंच चुके थे शाम 431 पर पाकिस्तानी आर्मी के लेफ्टनंट जनरल नियाजी ने आत्मसमर्पण के कागजों पर दस्तखत किए। भारतीय सेना की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने इसे रिसीव किया। ढाका के रेस कोर्स मैदान में इकट्ठी हजारों लोगों की भीड़ नारे लगा रही थी। मुक्ति वाहिनी जिंदाबाद, तोमार आमार ठिकाना, पद्मा मेघना जमुना। यह मुक्ति का घोष था। पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों से, बांगला भाषियों की मुक्ति का तारीख 16 दिसंबर 1971 थी।  बांग्लादेश  स्वतंत्र देश था ढाका इस स्वतंत्र देश की स्वतंत्र राजधानी 13 दिन तक चले युद्ध के बाद भारतीय सेना ढाका में थी पाकिस्तान दो टुकड़ों में बट चुका था पूर्वी पाकिस्तान का अस्तित्व खत्म हो चुका था लेकिन यह केवल 13 दिन की लड़ाई नहीं थी यह भाषाई भेदभाव और सैन्य अत्याचारों के खिलाफ करीब ढाई दशक का संघर्ष था। लेकिन बांग्लादेश के बनने से पहले नरसंहार की वो काली रात की कहानी का जिक्र बहुत कम होता है। जिसने पूरी मानवता को शर्मशार कर दिया था। बांग्लादेश में 25 मार्च 1971 को नरसंहार दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सर्चलाइट के नाम पर तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान ने निहत्थे लोगों का कत्लेआम किया था। 2017 को शेख हसीना की सरकार के कार्यकाल में बांग्लादेश की संसद ने सर्वसम्मति से इसे नरसंहार दिवस घोषित किया था।

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बांग्लादेश के इतिहास का शर्मनाक दिन

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 25 मार्च को मनाए जाने वाले 'नरसंहार दिवस' के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। यह दिवस 1971 में पाकिस्तानी कब्ज़ा करने वाली सेनाओं द्वारा मूल बंगाली लोगों के खिलाफ किए गए अकल्पनीय अत्याचारों और हत्याओं की याद में मनाया जाता है। एक्स पर जारी एक आधिकारिक बयान में, रहमान ने 25 मार्च, 1971 को बांग्लादेश के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक बताया। यह वह दिन था जब पाकिस्तानी कब्ज़ा करने वाली सेनाओं ने ऑपरेशन सर्चलाइट शुरू किया था, जिसके तहत उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय, पिलखाना, राजारबाग पुलिस लाइन्स और अन्य स्थानों पर रात के अंधेरे में निहत्थे नागरिकों, छात्रों, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों का सुनियोजित नरसंहार किया था। रहमान ने लिखा कि हालाँकि, 25 मार्च की रात को चटोग्राम में स्थित 8वीं पूर्वी बंगाल रेजिमेंट ने ‘हम विद्रोह करते हैं’ का नारा लगाकर नरसंहार के विरुद्ध औपचारिक रूप से सशस्त्र प्रतिरोध की शुरुआत की। इस नरसंहार के प्रतिरोध से ही नौ महीने लंबा सशस्त्र मुक्ति युद्ध शुरू हुआ। पाकिस्तानी सेना द्वारा पूर्वी पाकिस्तान (जिसे उस समय बांग्लादेश कहा जाता था) के बंगाली लोगों के विरुद्ध किए गए क्रूर नरसंहार ने नौ महीने लंबे बांग्लादेश मुक्ति युद्ध को जन्म दिया, जो दिसंबर 1971 में स्वतंत्रता के साथ समाप्त हुआ। रहमान ने नागरिकों से लोकतांत्रिक और समृद्ध बांग्लादेश के निर्माण के दौरान नई पीढ़ी में समानता, मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय की भावना को स्थापित करने का आग्रह किया। उन्होंने शहीदों की आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।

बांग्लादेश आधिकारिक तौर पर 25 मार्च को नरसंहार दिवस के रूप में मनाता है, ताकि उन अत्याचारों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी जा सके, जिनमें अनुमानित तौर पर लाखों लोगों की जान गई, जिनमें से अधिकांश नागरिक थे। रहमान ने पोस्ट किया, आइए हम सब मिलकर एक न्यायपूर्ण, विकसित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और लोकतांत्रिक बांग्लादेश का निर्माण करें।

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मौलाना अबुल कलाम ने पहले ही जता दी थी आशंका

इंडियन एक्सप्रेस में छपे एक आर्टिकल में प्रसिद्ध बांग्लादेशी कवि दाऊद हैदर लिखते हैं अप्रैल 1946 में ही मौलाना अबुल कलाम आजाद ने इसकी आशंका जाहिर कर दी थी। एक कश्मीरी पत्रकार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि बंगाल बाहरी प्रभुत्व और सत्ता के आगे झुकने वाला नहीं है। देर सवेर बंगाली विरोध करेंगे। मेरा मानना है कि पूर्वी पाकिस्तान कभी भी पश्चिमी पाकिस्तान के वर्चस्व को बर्दाश्त नहीं कर सकता और यही हुआ भी ।बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान ने पश्चिमी पाकिस्तान के वर्चस्व को चुनौती देनी शुरू की मार्च 1966 में आवामी लीग ने रैलियां शुरू कर दी आंदोलन फैलने लगा मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया अयूब खान की सरकार ने आंदोलनकारियों पर अगरतला षड्यंत्र का आरोप लगाया। आरोप यह कि वे भारत के साथ मिलकर पूर्वी पाकिस्तान को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं। हालांकि बांगला भाषी एकजुट होकर मुजीबुर रहमान की रिहाई के लिए अड़ गए। इसी बीच 1970 में आम चुनाव हुए यह पाकिस्तान का पहला चुनाव था। कुल 300 सीटों में से 160 सीटें आवामी लीग यानी शेख मुजीब रहमान के हिस्से आई। शेख मुजीब के पास पूर्ण बहुमत था। लेकिन सभी सीटें पूर्वी पाकिस्तान की थी। पश्चिमी पाकिस्तान के मिलिट्री जनरल्स और नेताओं को यह मंजूर नहीं था कि कोई बंगाली उन पर शासन करें।

करीब 2 लाख महिलाओं के साथ बलात्कार

पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति याया खान ने आवामी लीग को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया। 7 मार्च 1971 को मुजीबुर रहमान ने किसी भी कीमत पर बांग्लादेश को आजाद कराने का आवाहन किया। उन्होंने कहा कहा कि यह लड़ाई हमारी आजादी के लिए है जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान में आंदोलन शुरू हो गया। मुजीबुर रहमान को फिर से जेल में बंद कर दिया गया। पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना का अत्याचार शुरू हो गया। 25-26 मार्च की रात को पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी आर्मी ने भयानक नरसंहार किया महिलाओं बच्चों किसी को भी नहीं बख्शा गया। लोगों को घरों से गांव से बाहर निकालकर आर्मी ने खुलेआम गोलियां बरसाई। महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। भारत की ओर भाग रहे शरणार्थियों को घेर कर फायरिंग की गई। बांग्लादेशी अथॉरिटीज के आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तानी आर्मी ने 30 लाख लोगों की हत्या और करीब 2 लाख महिलाओं के साथ बलात्कार किया। यह मानव इतिहास के जघन्य समम अपराधों में से एक है।

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पाकिस्तानी सेना के लिए बड़ा झटका

तारिक रहमान का बयान पाकिस्तान की सेना के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान ढाका में पाकिस्तान ने तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की थी। यूनुस के कार्यकाल में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में अपेक्षाकृत अधिक पहुंच मिली थी। ऐसे में तारिक रहमान की हालिया टिप्पणी को विशेषज्ञ पाकिस्तान के लिए एक ‘रेड फ्लैग’ के रूप में देख रहे हैं। किंग्स कॉलेज लंदन की सीनियर फेलो आयशा सिद्दीका ने भी इस मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित किया है। रहमान के बयान को रीपोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि इस समय इस्लामाबाद अन्य मामलों में इतना व्यस्त है कि शायद वह अपने ही रणनीतिक साझेदार के संकेतों को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

जब भारत के सामने घुटनों पर आया पाकिस्तान

पूर्वी पाकिस्तान से लाखों की संख्या में शरणार्थी जान बचाकर भारत की सीमाओं में घुस रहे थे। भारत ने पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों का प्रतिकार करने की। अपील पूरी दुनिया से की। पाकिस्तान ने भारत पर गृह युद्ध भड़काने का आरोप लगाया। भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध तय माना जा रहा था। इसी बीच 4 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया। पाकिस्तान को पश्चिमी देशों और चीन से मदद की उम्मीद थी।  लेकिन ना तो यह उम्मीदें और ना ही पाकिस्तान की सेना ज्यादा दिन तक टिक पाई। 13 दिन तक युद्ध चला। 16 दिसंबर 1971 को शाम 4:30 बजे हजारों लोगों की मौजूदगी में ढाका के रेस कोर्स मैदान पर पाकिस्तानी सेना के 93000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया। ढाका से करीब 1900 किमी दूर नई दिल्ली में लोकसभा का सत्र चल रहा था। शाम करीब 5:30 पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी एक अहम अनाउंसमेंट करने के लिए खड़ी हुई। उन्होंने कहा ढाका अब स्वतंत्र बांग्लादेश की स्वतंत्र राजधानी है।

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