World Gold Council रिपोर्ट: सितंबर तिमाही में सोने की वैश्विक मांग घटकर 1,369 टन रही

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विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार कीमतों में अनिश्चितता के कारण सितंबर तिमाही में सोने की वैश्विक मांग में एक प्रतिशत की वार्षिक गिरावट दर्ज की गई। इस अवधि में आभूषणों की खरीद कमजोर होकर 313 टन रह गई, जबकि केंद्रीय बैंकों ने 321 टन सोने की मजबूत शुद्ध खरीदारी की।

मुंबई, तीन नवंबर विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच सितंबर तिमाही के दौरान सोने की वैश्विक मांग सालाना आधार पर एक प्रतिशत घटकर 1,369 टन रह गई। तीसरी तिमाही 2026 स्वर्ण मांग रुझान रिपोर्ट में कहा गया कि इस साल की तीसरी तिमाही के दौरान सोने की औसत कीमत 4,262 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस रही और मांग का मूल्य सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 188 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। एक ट्रॉय औंस में 31.103 ग्राम होते हैं।

ऊंची कीमतों का आभूषणों की मांग पर प्रतिकूल असर जारी रहा, जो सालाना आधार पर 17 प्रतिशत गिरकर 313 टन पर आ गई। यह किसी भी तीसरी तिमाही का सबसे कमजोर स्तर है। यह महामारी से प्रभावित 2020 की तीसरी तिमाही से भी कम है, जब आभूषणों की मांग 331 टन रही थी।

ग्राहकों के बीच हल्के और कम कैरेट वाले आभूषण खरीदने का रुझान जारी रहा, जबकि वैश्विक स्तर पर आभूषण मांग का मूल्य मामूली रूप से बढ़कर 43 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। डब्ल्यूजीसी के क्षेत्रीय मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ-भारत) सचिन जैन ने पीटीआई-भाषा को बताया, क्षेत्रवार देखें तो चीन में आभूषणों की मांग में लगभग 22 प्रतिशत और भारत में करीब 19.5 प्रतिशत की गिरावट आई। अमेरिका, पश्चिम एशिया और सऊदी अरब सहित अधिकांश देशों में भी मांग प्रभावित हुई है।

हालांकि, चीन और भारत में मौसमी सुधार और कीमतों में नरमी से मिले कुछ समर्थन के चलते तिमाही-दर-तिमाही आधार पर मांग में 12 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया गया। इस बीच, भौतिक सोने से समर्थित गोल्ड ईटीएफ में तीसरी तिमाही में फिर से निवेश आया और इसमें 211 टन की वृद्धि हुई। यह दूसरी तिमाही में दर्ज की गई निकासी के मुकाबले एक बड़ा बदलाव है।

यूरोप में सूचीबद्ध कोषों ने इस वृद्धि का नेतृत्व किया और 92 टन सोना जोड़ा। यह 2022 की पहली तिमाही के बाद से सबसे मजबूत तिमाही वृद्धि है, क्योंकि जून की बिकवाली के बाद पूरे क्षेत्र के निवेशकों ने फिर से अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। जैन ने कहा, ‘‘ऐतिहासिक रूप से जब भी सोने की कीमत नीचे जाती है, तो ईटीएफ से आमतौर पर निकासी होती है।

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस तिमाही में काफी अधिक निवेश आया, जिससे यह बेहद मजबूत रहा। सोने की छड़ और सिक्कों की मांग सालाना आधार पर 19 प्रतिशत घटकर 268 टन रह गई, क्योंकि कीमतों की स्पष्ट दिशा न होने के कारण व्यक्तिगत निवेशकों ने दूरी बनाए रखी। केंद्रीय बैंकों और अन्य आधिकारिक संस्थानों ने जुलाई-सितंबर की अवधि के दौरान अपने भंडार में शुद्ध रूप से 321 टन सोना जोड़ा।

यह सालाना आधार पर 42 प्रतिशत अधिक है और 2024 की चौथी तिमाही के बाद से सबसे बड़ा तिमाही आंकड़ा है। पोर्टफोलियो में विविधता लाना और जोखिम प्रबंधन इस मांग के प्रमुख कारण बने रहे। इस रुझान को चीन, पोलैंड और चेक गणराज्य से बल मिला।

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