Temasek ने Air India में सिंगापुर एयरलाइंस के निवेश का किया बचाव, बताया दीर्घकालिक कदम

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सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक ने कहा है कि एयर इंडिया में बड़े पैमाने पर बदलाव और एकीकरण की प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं। कंपनी के अनुसार अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार है, जहां दूसरा विमानन केंद्र विकसित करना सिंगापुर एयरलाइंस की रणनीति के अनुकूल है।

टेमासेक कंपनी ने एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस के निवेश का समर्थन किया है और कहा कि भारतीय एयरलाइन में बड़े स्तर पर बदलाव की प्रक्रिया में परिचालन तथा एकीकरण संबंधी चुनौतियां शामिल हैं, जिनमें कई साल लग सकते है। सिंगापुर एयरलाइंस (एसआईए) में हिस्सेदारी रखने वाली सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक ने यह बयान ऐसे समय में दिया, जब कुछ हलकों ने घाटे में चल रही एयर इंडिया में एयरलाइन के निवेश को लेकर चिंता जताई गई थी। सिंगापुर एयरलाइंस की एयर इंडिया में 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

शेष हिस्सेदारी टाटा संस के पास है, जिसने जनवरी 2022 में सरकार से भारतीय विमानन कंपनी का अधिग्रहण किया था। टेमासेक ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि एसआईए ने सिंगापुर से बाहर दीर्घकालिक वृद्धि सुनिश्चित करने के मकसद से दूसरा विमानन केंद्र विकसित करने में निवेश करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी ने कहा, ‘‘अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन क्षेत्र है और दूसरे विमानन केंद्र बनने के लिए यह उपयुक्त है।

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सिंगापुर एयरलाइंस लंबे समय से भारतीय बाजार में मौजूद है। इसमें 2013 से विस्तारा के जरिये परिचालन मौजूदगी भी शामिल है। एयर इंडिया में उसका निवेश भारत की विमानन क्षेत्र की वृद्धि में उसकी भागीदारी को और मजबूत करने का अवसर देता है।’’ सिंगापुर के सांसद केनेथ टियोंग बून कियाट ने इस सप्ताह की शुरुआत में सोशल मीडिया पर एक खबर का हवाला देते हुए सिंगापुर एयरलाइंस द्वारा एयर इंडिया में और निवेश किए जाने को लेकर चिंता जताई थी।

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सिंगापुर एयरलाइंस समूह का शुद्ध लाभ मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में 57 प्रतिशत घटकर 1.184 अरब सिंगापुर डॉलर (करीब 8,900 करोड़ रुपये) रह गया है। इसकी मुख्य वजह पिछले वित्त वर्ष में विस्तारा के विलय से संबंधित एकमुश्त लेखांकन लाभ का नहीं होना और एयर इंडिया का घाटा रहा। एयर इंडिया का घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में 3.56 अरब सिंगापुर डॉलर (26,700 करोड़ रुपये से अधिक) रहा है।

इस दौरान कंपनी को हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों और अन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

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