Taxpayers सावधान! Form 16 की जगह लेगा नया Form 130, Income Tax के नियमों में हो रहा बड़ा फेरबदल

income tax
प्रतिरूप फोटो
Pixabay
Ankit Jaiswal । Mar 25 2026 8:26PM

आयकर के नए नियमों के तहत टैक्सपेयर्स को 1 अप्रैल 2026 से ITR फाइलिंग में बड़े बदलावों का सामना करना पड़ेगा, जिसमें सबसे प्रमुख है फॉर्म 16 को हटाकर अधिक विस्तृत फॉर्म 130 का आना। इन प्रणाली-आधारित नियमों से जहां वेतनभोगी लोगों को राहत मिल सकती है, वहीं निवेशकों को पूंजीगत लाभ और संपत्ति का सटीक ब्योरा देना होगा क्योंकि अब जानकारी का मिलान स्वचालित होगा।

आने वाले समय में आयकर रिटर्न भरने का तरीका पहले से काफी अलग नजर आने वाला है और टैक्सपेयर्स को नई व्यवस्था के मुताबिक खुद को तैयार करना होगा।

बता दें कि 1 अप्रैल 2026 से नए आयकर नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनके तहत रिटर्न दाखिल करने की पूरी प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए गए हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार ने केवल फॉर्म में बदलाव नहीं किया है, बल्कि पूरी प्रणाली को ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम उठाया है।

गौरतलब है कि इस बदलाव के केंद्र में तीन अहम बातें हैं, जिनमें नए प्रारूप के रिटर्न फॉर्म, पुराने फॉर्म 16 की जगह नए फॉर्म 130 का इस्तेमाल और पूरी प्रक्रिया को अधिक डिजिटल व प्रणाली आधारित बनाना शामिल है।

नए नियमों के तहत रिटर्न फॉर्म को पूरी तरह से फिर से तैयार किया गया है। इसमें आय और कटौतियों की जानकारी पहले से ज्यादा विस्तार में देनी होगी। खासतौर पर पूंजीगत लाभ को अल्पकालिक और दीर्घकालिक श्रेणियों में स्पष्ट रूप से बताना जरूरी होगा। साथ ही संपत्तियों से जुड़ी जानकारी भी ज्यादा विस्तृत तरीके से मांगी जा सकती है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अब संपत्ति की अवधि और उसके मूल्यांकन के लिए भी तय नियम लागू होंगे, जिससे गलत जानकारी देने की संभावना कम हो सके। इससे निवेश करने वाले और ज्यादा आय वाले करदाताओं के लिए प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो सकती है, जबकि वेतनभोगी लोगों के लिए पहले से भरे हुए रिटर्न कुछ हद तक राहत दे सकते हैं।

बता दें कि सबसे बड़ा बदलाव फॉर्म 16 को हटाकर फॉर्म 130 लागू करना है। यह फॉर्म भी नियोक्ता द्वारा जारी किया जाएगा, लेकिन इसमें वेतन, कटौती, कर योग्य आय और कर देनदारी से जुड़ी जानकारी पहले से कहीं ज्यादा विस्तार में दी जाएगी।

गौरतलब है कि यह नया फॉर्म पूरी तरह से प्रणाली आधारित होगा और इसे सीधे पोर्टल से डाउनलोड करना होगा। इसे हाथ से तैयार नहीं किया जा सकेगा। साथ ही यह तभी जारी होगा, जब तिमाही कर कटौती का विवरण सही तरीके से जमा किया गया होगा।

इसका सीधा असर यह होगा कि करदाताओं की जानकारी अब प्रणाली से मिलान के आधार पर जांची जाएगी। किसी भी तरह की गलती या अंतर तुरंत सामने आ सकता है, जिससे रिटर्न प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, नए नियमों के साथ रिटर्न प्रक्रिया ज्यादा स्वचालित हो जाएगी। इसमें पहले से भरी जानकारी, स्वतः जांच और आंकड़ों के मिलान की सुविधा बढ़ेगी। इससे सही जानकारी देने वालों को फायदा होगा, जबकि गलत या अधूरी जानकारी देने वालों को परेशानी हो सकती है।

जहां तक रिफंड की बात है, उसमें सीधे तौर पर समय सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि जिन मामलों में जानकारी सही होगी, वहां रिफंड जल्दी मिल सकता है। वहीं अगर आंकड़ों में अंतर पाया गया तो देरी भी हो सकती है।

बताते चलें कि इन बदलावों का असर अलग-अलग वर्गों पर अलग तरीके से पड़ेगा। वेतनभोगी लोगों को नया फॉर्म और पहले से भरे रिटर्न देखने को मिलेंगे, जबकि निवेश करने वालों को अपनी आय का ज्यादा सटीक विवरण देना होगा। वहीं वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन और ब्याज आय की संयुक्त जानकारी से कुछ राहत मिल सकती है।

इस तरह देखा जाए तो नए आयकर नियम कर की दर बढ़ाने के बजाय पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने पर केंद्रित हैं और आने वाले समय में करदाताओं के लिए सही जानकारी देना सबसे महत्वपूर्ण पहलू बनकर सामने आने वाला है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़