भारत से धड़ाधड़ सामान खरीद रहा पाकिस्तान, आप भी जानें दिलचस्प आंकड़े

आतंकी हमले के बाद सीधा व्यापार बंद होने के बावजूद पाकिस्तान में भारतीय वस्तुओं की मांग बनी हुई है। पहली तिमाही में भारत से पाकिस्तान के आयात में 69% की वृद्धि हुई, जिसमें दवाएं प्रमुख हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सामान दुबई और सिंगापुर जैसे तीसरे देशों के जरिए लेबल बदलकर पाकिस्तान पहुंचाया जा रहा है।
2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच सीधा व्यापार निलंबित रहने के बावजूद, हालिया आंकड़े बताते हैं कि इस्लामाबाद में भारतीय वस्तुओं की भारी मांग बनी हुई है। डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में पाकिस्तान ने भारत से 61.74 मिलियन डॉलर (5,876 करोड़ रुपये) का सामान आयात किया। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के 36.55 मिलियन डॉलर (3,478 करोड़ रुपये) के मुकाबले 69% की वृद्धि दर्शाता है। हालांकि, इसी अवधि के दौरान पाकिस्तान से भारत को कोई निर्यात दर्ज नहीं किया गया।
भारत से पाकिस्तान के आयात में 69% की भारी वृद्धि
भू-राजनीतिक विशेषज्ञ रविंदर सिंह रॉबिन ने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान में भारतीय सामानों की मांग लगातार बनी हुई है। रॉबिन ने ट्वीट किया अगर सीधा व्यापार बंद है, तो ये सामान किस रास्ते से आ रहे हैं, और इनके मूल देश (कंट्री ऑफ ओरिजिन) व स्रोत को कैसे दर्ज किया जा रहा है? क्या ऐसा हो सकता है कि कुछ सामान तीसरे देशों के रास्ते पाकिस्तान पहुंच रहे हों? उन्होंने आगे कहा कि अगर यह मांग काफी अहम है, तो क्या इस्लामाबाद को इस बात पर विचार नहीं करना चाहिए कि सामान्य संबंध बहाल करने के लिए क्या कदम उठाने होंगे - जिसमें आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करना और आतंकवादी समूहों द्वारा पाकिस्तानी ज़मीन का कथित इस्तेमाल रोकना शामिल है? भारत से पाकिस्तान होने वाले आयात में फार्मास्यूटिकल उत्पाद प्रमुख हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2025 तक भारत से पाकिस्तान को होने वाला फार्मा निर्यात 208 मिलियन डॉलर का था।
अन्य प्रमुख वस्तुओं में प्लास्टिक, पेट्रोलियम, डाई, ऑर्गेनिक रसायन, रबर, कॉफी, चाय, सब्जियां, मसाले, डेयरी उत्पाद और अनाज शामिल हैं। हालांकि, भारत द्वारा वाघा-अटारी बॉर्डर को बंद करने के फैसले के बाद - जो व्यापार के लिए अनुमति प्राप्त एकमात्र ज़मीनी रास्ता था अब दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग शून्य हो गया है। यह कदम पिछले साल पहलगाम में पाकिस्तान स्थित लश्कर के आतंकवादियों द्वारा 25 पर्यटकों की बेरहमी से हत्या किए जाने के बाद उठाया गया था, जिसके कारण तीन दिनों तक संघर्ष चला था। इस घटना ने भारत के इस कड़े रुख को और मज़बूत कर दिया है कि "आतंक और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते। भारत ने पाकिस्तान से आने वाले या वहां से निर्यात किए जाने वाले सामानों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात, या उनके वहां से होकर गुजरने (ट्रांजिट) पर प्रतिबंध लगा दिया है। 4 मई को, पाकिस्तान ने भी भारत के साथ अपना सारा व्यापार रोक दिया, जिसमें तीसरे देशों के जरिए होने वाला व्यापार भी शामिल है। हालांकि, इस प्रतिबंध के बावजूद, भारतीय सामान किसी तरह सीमा पार पाकिस्तान पहुंच ही गए।
अरब न्यूज़' की एक रिपोर्ट के अनुसार 'स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान' के आंकड़ों का हवाला दिया गया है - 'ऑपरेशन सिंदूर' के कुछ हफ्तों बाद, जुलाई से सितंबर 2025 के बीच, पाकिस्तान ने भारत से 36.6 मिलियन डॉलर मूल्य का सामान आयात किया। यह आयात लगभग पूरी तरह से फार्मास्युटिकल (दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले) कच्चे माल का था।
भारतीय सामान पाकिस्तान कैसे पहुँच रहा है?
तो, व्यापार पर प्रतिबंध होने के बावजूद, यह सामान पाकिस्तान कैसे पहुँच रहा है? भू-राजनीतिक विशेषज्ञ रॉबिन के अनुसार, संभवतः इन सामानों को तीसरे देशों के रास्ते भेजा जा रहा है, ताकि प्रतिबंधों से बचा जा सके और जांच-पड़ताल से बचा जा सके। इसके बाद इन उत्पादों पर नए लेबल लगा दिए जाते हैं, जिससे इनकी कीमत बढ़ जाती है। थिंक टैंक 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (GTRI) के अनुसार, पाकिस्तान को होने वाला अनौपचारिक भारतीय निर्यात सालाना 10 अरब डॉलर का हो सकता है। सामान को दूसरे रास्तों से भेजने के मुख्य केंद्र दुबई, कोलंबो और सिंगापुर हैं। GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में इसे "ग्रे-ज़ोन रणनीति" (grey-zone strategy) कहा है। इसमें सामान को ऐसे स्थानों पर ले जाया जाता है जहाँ से उसे दूसरे जहाजों में स्थानांतरित कर दिया जाता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिबंधों से बचा जा सके। श्रीवास्तव ने बताया भारतीय सामान दुबई, सिंगापुर और कोलंबो भेजा जाता है। वहाँ इन सामानों को ट्रांजिट हब में स्थित 'बॉन्डेड वेयरहाउस' (सीमा शुल्क मुक्त गोदामों) में रखा जाता है। यहाँ रखे जाने के दौरान - जब इन पर कोई शुल्क नहीं लगता - इनके दस्तावेज़ और लेबल बदल दिए जाते हैं। इसके बाद, इन उत्पादों को एक नए 'कंट्री ऑफ़ ओरिजिन' (उत्पत्ति देश) के साथ पाकिस्तान भेज दिया जाता है - उदाहरण के लिए, भारत की जगह UAE बताकर।
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