पत्रकार Siddiq Kappan के पासपोर्ट मामले में Supreme Court में सुनवाई 2 नवंबर तक टली

हाथरस साजिश मामले में जमानत पर बाहर केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन का पासपोर्ट लौटाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब दो नवंबर को विचार करेगा। उत्तर प्रदेश सरकार की वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें सुबह ही यह अर्जी मिली है और इस पर आवश्यक निर्देश लेने के लिए समय चाहिए। इसके बाद न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने मामले को स्थगित करने का फैसला सुनाया।
उच्चतम न्यायालय ने हाथरस साजिश मामले में जमानत की शर्त के तहत जमा कराए गए पासपोर्ट को वापस करने का अनुरोध करने वाली केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन की एक याचिका पर सुनवाई मंगलवार को दो नवंबर के लिए टाल दी। न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने उत्तर प्रदेश की स्थायी वकील रुचिरा गोयल के यह कहने के बाद सुनवाई स्थगित कर दी कि उन्हें सुबह ही आवेदन मिला है और इस पर निर्देश लेने की जरूरत है। पीठ ने उनकी दलील स्वीकार करते हुए कहा कि मामले पर दो नवंबर को सुनवाई की जाएगी।
कप्पन को छह अक्टूबर 2020 को उत्तर प्रदेश के हाथरस से उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वह वहां एक दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या की घटना की रिपोर्टिंग के लिए जा रहे थे। इस घटना के बाद दंगे भड़काने की कथित साजिश के आरोप में उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था। शीर्ष अदालत ने नौ सितंबर, 2022 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ कप्पन की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत दे दी थी।
शीर्ष अदालत ने जमानत के लिए कई शर्तें लगायी थीं। इनमें जेल से रिहा होने के बाद अगले छह महीने तक दिल्ली में रहने और हर सप्ताह सोमवार को यहां निजामुद्दीन थाने में हाजिरी लगाने की शर्त भी शामिल थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि छह महीने की अवधि पूरी होने के बाद वह केरल स्थित अपने गृह जिले मलप्पुरम जा सकते हैं।
वहां भी उन्हें प्रत्येक सोमवार को स्थानीय थाने में हाजिरी लगानी होगी। शीर्ष अदालत ने कहा था, “अपीलकर्ता अधीनस्थ अदालत की स्पष्ट अनुमति के बिना दिल्ली के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जाएंगे। अपीलकर्ता प्रत्येक दिन स्वयं या अपने वकील के माध्यम से अधीनस्थ अदालत में उपस्थित होंगे।
अपीलकर्ता अपना पासपोर्ट जांच एजेंसी के पास जमा करेंगे।” इस मामले में प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से कथित संबंध रखने वाले चार लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने पहले दावा किया था कि आरोपी हाथरस में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2022 में कप्पन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
अदालत ने कहा था, “मामले के तथ्यों और परिस्थितियों, अपराध की प्रकृति, रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपी की संलिप्तता, सजा की गंभीरता और शीर्ष अदालत द्वारा प्रतिपादित स्थापित कानून को ध्यान में रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना, इस स्तर पर यह अदालत याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने के पक्ष में नहीं है।” इससे पहले मथुरा की एक अदालत भी कप्पन की जमानत याचिका खारिज कर चुकी थी। दलित युवती की 14 सितंबर 2020 को उसके गांव के ही चार लोगों द्वारा कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किए जाने के करीब दो सप्ताह बाद दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई थी। युवती का अंतिम संस्कार उसके गांव में आधी रात के दौरान किया गया था।
उसके परिवार ने दावा किया था कि अंतिम संस्कार उनकी सहमति के बिना किया गया और उन्हें शव आखिरी बार घर लाने नहीं दिया गया था।
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