भारत में New-Age Economy का रेवेन्यू 2031 तक 300 अरब डॉलर पहुंचेगा: Redseer Report

रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डिजिटल नवाचार और ज्ञान आधारित पूंजी से चलने वाली कंपनियों का राजस्व वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर 300 अरब डॉलर हो सकता है। उपभोग आधारित क्षेत्र जैसे खुदरा, उपभोक्ता वस्तुएं और मनोरंजन इस भारी बढ़त की मुख्य धुरी बनेंगे। हालांकि, कुल मुनाफे का बड़ा हिस्सा केवल वित्तीय सेवाओं जैसे चुनिंदा क्षेत्रों में ही केंद्रित रहने का अनुमान है।
भारत में नए दौर की अर्थव्यवस्था का राजस्व वित्त वर्ष 2030-31 तक तीन गुना होकर करीब 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि, इस वृद्धि के बावजूद मुनाफे का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक ही सीमित रहने का अनुमान है। रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
नए दौर की अर्थव्यवस्था से आशय ऐसी अर्थव्यवस्था से है जो कृत्रिम मेधा (एआई), ज्ञान-आधारित पूंजी और डिजिटल नवाचार से संचालित होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए दौर की घरेलू कंपनियों का संयुक्त राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 के 33 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 100 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है। इसके सालाना 25 प्रतिशत की दर से बढ़कर वित्त वर्ष 2030-31 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
रेडसीर ने कहा कि उपभोक्ता वस्तुएं, खुदरा और मनोरंजन जैसे उपभोग आधारित क्षेत्र इस विस्तार की आधारशिला बने रहेंगे। इनके सालाना 25 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2030-31 तक 150 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है, जो कुल बाजार का करीब आधा हिस्सा होगा। वहीं, प्रौद्योगिकी, मीडिया एवं दूरसंचार, एआई और उन्नत विनिर्माण जैसे उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्र सालाना 26 प्रतिशत की दर से बढ़ सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों का सामूहिक मुनाफा वित्त वर्ष 2024-25 में पहली बार सकारात्मक होकर 1.4 अरब डॉलर रहा। हालांकि, मुनाफा कुछ क्षेत्रों में ही केंद्रित है। वित्त वर्ष 2024-25 के कुल लाभ में अकेले बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र का योगदान 140 प्रतिशत रहा।
बीएफएसआई को हटाने पर बाकी सभी क्षेत्रों को मिलाकर भी घाटे की स्थिति रहती है। वित्त वर्ष 2030-31 तक 300 अरब डॉलर का राजस्व हासिल होने पर कुल मुनाफा 5-10 अरब डॉलर रह सकता है, जो दो-तीन प्रतिशत मार्जिन के बराबर होगा। इसकी तुलना में रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली (एफएमसीजी) सूचीबद्ध कंपनियों का मार्जिन 12-18 प्रतिशत और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा कंपनियों का 20-25 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता वस्तुओं के नए ब्रांडों को बड़े पैमाने पर कारोबार खड़ा करने में लगने वाला समय भी कम हुआ है। सीधे ग्राहक को बिक्री (डी2सी) और त्वरित वाणिज्य के विस्तार से 100 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने में लगने वाला समय 6.8 साल से घटकर 3.4 साल रह गया है। इसी तरह, 500 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने का समय 7.9 साल से घटकर चार साल रह गया है।
रेडसीर का अनुमान है कि 100 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व वाले नए दौर के उपभोक्ता ब्रांडों की संख्या वित्त वर्ष 2021-22 के करीब 90 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 230 और वित्त वर्ष 2030-31 तक करीब 500 हो सकती है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार 500 करोड़ रुपये से आगे बढ़ना अभी भी चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए मजबूत ऑफलाइन वितरण नेटवर्क, आधुनिक खुदरा कारोबार की क्षमता और पर्याप्त कार्यशील पूंजी की जरूरत होती है।
पूंजी उपलब्धता के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी बाजार से नए दौर की कंपनियों के लिए वित्तपोषण कैलेंडर वर्ष 2026 में सालाना 25 प्रतिशत बढ़कर 17 अरब डॉलर हो सकता है। वर्ष 2030 तक सार्वजनिक और निजी बाजार से इन कंपनियों के लिए सालाना 50 अरब डॉलर तक की पूंजी जुटाने का अनुमान है।
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