AI इंसानों को भी खत्म कर देगा, 2030 तक ला देगा दुनिया में कैसी तबाही! किसने बजा दी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले महाखतरे की घंटी?

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अभिनय आकाश । Sep 10 2026 2:08PM

एआई बनाने वाली दुनिया की एक बड़ी कंपनी एंथ्रोपिक के रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने कंपनी छोड़ दी है। एंथ्रोपिक कंपनी के रिसर्च स्कॉलर जेकब कॉक्सन ने अपने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर दी।

मेल लिखवाना हो, 80 के दशक वाली फोटो बनवानी हो, किसी कंपनी का कारोबार खंगालना हो या एक लाइन के आईडिया से पूरी फिल्म की स्क्रिप्ट लिखनी हो, एआई सब कुछ एक सांस में कर सकता है। यह भी कह देता है कि आप चाहे तो मैं इसका वो वाला वर्जन बना दूं जो बिल्कुल ऐसा लगे कि इंसान ने बनाया है। लेकिन क्या एआई इंसान के अस्तित्व के लिए भी भविष्य में कभी खतरा बन सकता है। खतरे की बात गाहे बगाहे कही जाती रही है। लेकिन अब एक बड़ा डेवलपमेंट हुआ। एआई बनाने वाली दुनिया की एक बड़ी कंपनी एंथ्रोपिक के रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने कंपनी छोड़ दी है। एंथ्रोपिक कंपनी के रिसर्च स्कॉलर जेकब कॉक्सन ने अपने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर दी। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा एंथ्रोपिक और ओपन एi जैसी कंपनियां तेजी से इंसानों से भी ज्यादा समझदार एआई यानी कि सुपर इंटेलिजेंस बनाने की होड़ में लगी हुई हैं और यह लापरवाही लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रही है। ऐसा क्या हुआ जिसने एंथ्रोपी के कर्मचारी को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। जैकब कॉक्सन ने एक्स पर एक लंबा थ्रेड पोस्ट करते हुए इसका कारण बताया है। कॉक्सन का दावा यह था कि एआई लैब के अंदर लोग इस खतरे को अच्छी तरह समझते हैं। फिर भी काम चलता जा रहा है। एआई बनाने वाले भी यह मानते हैं कि एआई हम सभी को खत्म कर देगा। कॉक्सन ने आगे यह भी लिखा कि बड़ी-बड़ी कंपनियों के अधिकारी और रिस्चरर्स मीडिया के सामने तो बहुत सोच समझकर और जिम्मेदारी से भरी बातें करते हैं। लेकिन मैंने उन्हें लोगों को प्राइवेट में डर जताते हुए सुना है। यह लोग जो सिस्टम बनाए जा रहे हैं वो किसी भी चीज को हैक कर सकता है। रातोंरात किसी भी इलाके में क्रांति ला सकता है और असली ताकत और रिसोर्सेज हासिल कर सकता है और यह ग्रोथ बिल्कुल भी धीमी नहीं पड़ रही है। उन्होंने उन दोनों कंपनियों के बीच का फर्क भी साफ किया जहां उन्होंने काम किया था। उन्होंने लिखा ओपन एआई में कई लोगों ने इस खतरे को गंभीरता और सिविलाइजेशन पर पड़ने वाले असर को गहराई से महसूस नहीं किया।

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समझ का फर्क 

एआई को लेकर चेतावनी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जितने शक्तिशाली मॉडल बन रहे हैं, उनके भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया उतनी ही जटिल और कम पारदर्शी होती जा रही है। ऐसा नहीं है कि यह स्थिति अचानक आई। मार्च 2023 में इलॉन मस्क, एपल के को-फाउंडर Steve Wozniak समेत कई हस्तियों ने AI के डिवेलपमेंट को लेकर चेताया था। इसके अलावा, एक बड़ी चिंता पर्यावरण को लेकर है। भारी-भरकम सर्वर और डेटा सेंटर बहुत बड़ी मात्रा में बिजली-पानी की खपत कर रहे हैं। इनकी वजह से कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा है। हालांकि इन सारी बातों का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि तकनीक को यहीं पर रोक दिया जाए। AI ने मेडिकल, एजुकेशन, साइंस, रिसर्च और एग्रो सेक्टर में बड़े बदलाव की क्षमता दिखाई है। आज संसाधनों पर जितना दबाव है और दुनिया के सामने जिस तरह की चुनौतियां हैं, उनमें AI सहयोगी हो सकती है।

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कड़ी निगरानी की दरकार

 OpenAI के मुख्य वैज्ञानिक जैकब  ने हाल में कहा था कि AI जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उसके लिए इंसान तैयार नहीं हैं। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की सुरक्षा और निगरानी पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। सरकारों और दूसरी संस्थाओं को भी इसमें भूमिका निभानी होगी। केवल कंपनियों के भरोसे सब नहीं छोड़ा जा सकता। बेलगाम होड़ के बजाय सिक्योरिटी को प्राथमिकता देनी चाहिए और सबसे जरूरी, इस क्षेत्र से जुड़ी आवाजों को गंभीरता से सुनना चाहिए।

एंथ्रोपिक में काम करने वाले साइंटिस्ट ने कौन से 5 प्वाइंट सामने रखे

एंथ्रोपिक में काम करने वाले उनके दो साथियों ने भी इस बात का समर्थन किया है। एंथ्रोपिक के अलाइनमेंट साइंस लीड इवान ह्यूमबिगर ने वार्निंग दी है कि आने वाले 10 सालों में एआई की वजह से इंसानों का वजूद खतरे में पड़ने की 10% से ज्यादा आशंका है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी कंपनी बेहतर कोशिश तो कर रही है लेकिन एआई को काबू में रखने के लिए अभी तक उनके पास कोई ठोस प्लान नहीं है। यूबिंगर के मुताबिक असली खतरा आज के एआई से नहीं बल्कि उस सुपर एआई से है जो खुद को तेजी से और बेहतर बनाने में लगा हुआ है। इसी एंथ्रोपिक के एक दूसरे एंप्लॉय ने तस्वीर को और ज्यादा क्लियर करने के लिए पांच पॉइंट्स को भी सामने रखा। एंथ्रोपिक के साइंस ग्रुप में कॉग्निटिव ओवरसाइट टीम के हेड सेमुअल मार्क्स ने एक पोस्ट के जरिए पूरी स्थिति को समझाया। उनका पहला पॉइंट यह था कि एआई डेवलपर्स का खुद यह मानना है कि उनकी तकनीक कुछ ही सालों में इंसानी वजूद को पूरी तरह खत्म कर सकती है और यह चिंता सीनियर कर्मचारियों में सबसे ज्यादा है। दूसरा इसके बावजूद भी वो सिर्फ बिजनेस के फायदों और इस सोच की वजह से काम जारी रखे हुए हैं कि वह खुद से कम जिम्मेदार कॉम्पिटिट से आगे निकलने की होड़ में है। तीसरा एआई को आर्म सॉफ्टवेयर की तरह प्रोग्राम नहीं किया जा सकता। यह मिसबिव करने लग जाता है। चौथा पॉइंट मौजूदा तरीका एआई को बेहतर बिहेव करने के लिए कह सकते हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह से सुरक्षित और काबू में नहीं कर सकता। पांचवा कंपनी के कई कर्मचारी एआई को ज्यादा सेफ तरीके से बनाने के लिए रास्ते ढूंढने के लिए रफ्तार को बेहद धीमी करना चाहते हैं।

अपना आईपीओ लाने की तैयारी

कॉक्सन का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब एंथ्रोपिक अपना आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है। खबरें बता रही है कि यह इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है। कंपनी की संभावित वैल्यू्यूएशन करीब 2 ट्रिलियन तक होने की खबरें हैं। जेकब के इतने बड़े आरोप हैं जिसमें यह भी शामिल है कि इसी डेकेड के आखिर तक इंसानियत के लिए एआई खतरा पैदा कर सकता है। एंथ्रोपिक ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन एंथ्रोपिक में अलाइनमेंट साइंस के लीड इवान गुबिंगर ने जैकब के बयान पर सहमति जताई है। एक्स पर लिखा कि हम सच में मानते हैं कि एआईए सभी इंसानों को मार सकता है। मेरा अनुमान है कि अगले 10 साल में ऐसा होने की संभावना 10% ज्यादा है। मेरा विश्वास है कि एंथ्रोपिक अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है। लेकिन सुपर इंटेलिजेंस को पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित रखने का कोई पक्का प्लान अभी हमारे पास नहीं है और हम उस दिशा में स्पष्ट रूप से आगे भी नहीं बढ़ रहे। और यह चिंताएं लगातार उठाई जा रही हैं। 

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