HDFC Bank में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी, Kaizad Bharucha बन सकते हैं नए प्रमुख, RBI की मंजूरी अहम

एचडीएफसी बैंक के विलय के बाद उपजी परिचालन चुनौतियों और शेयर कीमतों में गिरावट के बीच नए मुख्य कार्यकारी की तलाश बैंक के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बन गई है। उप प्रबंध निदेशक कैजाद भरूचा के बैंकिंग अनुभव को देखते हुए उन्हें इस पद के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है ताकि निवेशकों का भरोसा पुन: प्राप्त किया जा सके। आगामी नेतृत्व के समक्ष विलय के बाद की वित्तीय लागतों का प्रबंधन करना और नियामक मानकों के अनुरूप बैंक को नई ऊंचाई पर ले जाने की कठिन चुनौती होगी। एचडीएफसी बैंक शेयर प्राइस, बैंकिंग प्रबंधन, कैजाद भरूचा, बिजनेस एनालिसिस।
एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती दिख रही है। बैंक के मौजूदा प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिधर जगदीशन के अक्टूबर में पद से हटने के बाद उप प्रबंध निदेशक कैजाद भरूचा प्रमुख आंतरिक दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। मामले से परिचित दो लोगों के अनुसार बैंक उनके नाम को संभावित विकल्पों में रख सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार एचडीएफसी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों को ध्यान में रखते हुए एक बाहरी उम्मीदवार की भी तलाश कर रहा है। केंद्रीय बैंक के नियमों के तहत बैंकों को मुख्य कार्यकारी पद के लिए एक से अधिक नाम प्रस्तावित करने होते हैं। अंतिम नियुक्ति पर फैसला भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी के बाद ही होगा।
कैजाद भरूचा एचडीएफसी बैंक में लंबे समय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। वह खुदरा और थोक बैंकिंग कारोबार की देखरेख करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं। उनके अनुभव और बैंक के विभिन्न कारोबारों की समझ को देखते हुए उन्हें आंतरिक विकल्प के तौर पर मजबूत माना जा रहा है।
बता दें कि भरूचा के 2029 तक पद पर बने रहने की संभावना है। तब तक वह पूर्णकालिक निदेशक के तौर पर 15 साल की अवधि पूरी करेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक पूर्णकालिक निदेशक के कार्यकाल की अधिकतम अवधि 15 वर्ष होती है, हालांकि कुछ परिस्थितियों में छूट का प्रावधान भी है।
एचडीएफसी बैंक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी की तलाश ऐसे समय हो रही है, जब पिछले करीब छह महीनों में बैंक को नेतृत्व से जुड़े कई घटनाक्रमों का सामना करना पड़ा है। शशिधर जगदीशन ने शनिवार को स्पष्ट किया कि वह अपने दूसरे कार्यकाल के बाद दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। उनका वर्तमान कार्यकाल अक्टूबर में समाप्त हो रहा है और बैंक के मुताबिक वह 26 अक्टूबर 2026 को कामकाज से सेवानिवृत्त होंगे।
गौरतलब है कि एचडीएफसी बैंक के तत्कालीन पार्ट टाइम अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती ने मार्च में पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपने फैसले के पीछे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता से जुड़े मतभेदों का हवाला दिया था। इसके बाद बैंक के संचालन और प्रशासन को लेकर कई सवाल उठे। हालांकि, बाद में कराई गई बाहरी कानूनी समीक्षा में चक्रवर्ती की ओर से उठाई गई प्रशासन संबंधी चिंताओं की पुष्टि करने वाला कोई प्रमाण नहीं मिला था।
इसी बीच पिछले महीने बैंक ने शशिधर जगदीशन और दो अन्य अधिकारियों पर बड़े जमा खातों की कीमत तय करने से जुड़े एक अलग मामले में जुर्माना लगाया था। बैंक ने उस समय मामले की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी।
इन घटनाक्रमों का असर बैंक के शेयरों पर भी पड़ा है। जून के अंत तक बैंक में करीब 40 प्रतिशत हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों के पास थी और इस साल शेयर का मूल्य लगभग 27 प्रतिशत नीचे आ चुका है। अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद गिरावट और तेज हुई है।
निवेशकों की एक बड़ी चिंता 2023 में एचडीएफसी लिमिटेड के एचडीएफसी बैंक में विलय के बाद अपेक्षित लाभ नहीं मिलने को लेकर भी है। शशिधर जगदीशन के नेतृत्व में हुए इस बड़े विलय ने बैंक का आकार काफी बढ़ाया, लेकिन इसके बाद ऊंची वित्तीय लागत और कारोबार को एकीकृत करने की चुनौतियां भी सामने आईं। अब नए मुख्य कार्यकारी की नियुक्ति बैंक के लिए सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि निवेशकों का भरोसा मजबूत करने की अहम परीक्षा भी होगी।
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