HDFC Bank CEO Shashidhar Jagdishan का बड़ा फैसला, 2026 में Retirement के साथ खत्म होगा शानदार कार्यकाल

एचडीएफसी बैंक में शशिधर जगदीशन का कार्यकाल समाप्त होने की घोषणा भारतीय निजी बैंकिंग क्षेत्र में संस्थागत उत्तराधिकार और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानकों पर नई बहस छेड़ती है। विलय के बाद की जटिलताओं और हालिया कानूनी विवादों के मद्देनजर, नया नेतृत्व बैंक की बाजार साख और नियामक अनुपालन को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण होगा, जो निवेशकों और एचडीएफसी बैंक अपडेट के लिए अनिवार्य है।
एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिधर जगदीशन ने अपने पद पर दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करने का फैसला किया है। बैंक ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि निदेशक मंडल ने जगदीशन के फैसले को स्वीकार कर लिया है और वह 26 अक्टूबर 2026 को कारोबारी समय समाप्त होने के साथ बैंक की सेवाओं से सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
बैंक के अनुसार, निदेशक मंडल ने जगदीशन को अपना फैसला बदलने के लिए समझाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने दोबारा नियुक्ति नहीं लेने के अपने निर्णय पर कायम रहने की बात कही। इसके बाद बैंक ने नए प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की तलाश की प्रक्रिया को तय समय से काफी पहले पूरा करने का फैसला किया है।
शशिधर जगदीशन को बैंक में उनके सहयोगियों के बीच ‘शशि’ के नाम से जाना जाता है। वह वर्ष 1996 में एचडीएफसी बैंक से जुड़े थे। शुरुआत वित्त विभाग में प्रबंधक के तौर पर हुई और 1999 में वह वित्त कारोबार के प्रमुख बने। वर्ष 2008 में उन्होंने बैंक के मुख्य वित्तीय अधिकारी की जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले वह मुंबई में डॉयचे बैंक में करीब तीन साल तक काम कर चुके थे।
जगदीशन ने आदित्य पुरी के सेवानिवृत्त होने के बाद बैंक के शीर्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में वर्ष 2023 में एचडीएफसी लिमिटेड का एचडीएफसी बैंक में विलय रहा। यह भारतीय कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े विलयों में शामिल था। बैंक के निदेशक मंडल ने भी इस विलय को सफलतापूर्वक पूरा कराने में जगदीशन की भूमिका की सराहना की है।
हालांकि, हाल के महीनों में बैंक और जगदीशन के सामने कई चुनौतियां भी रही हैं। बैंक के शेयर के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसी दौरान महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के साथ जमा राशि से जुड़े पुराने मामलों की आंतरिक समीक्षा भी हुई।
इस मामले में जगदीशन, बैंक के मुख्य वित्तीय अधिकारी और एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी पर कारोबार की सीमा से आगे बढ़ने को लेकर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। बैंक की स्वतंत्र निदेशकों की विशेष अनुशासन समिति ने इसे जानबूझकर गलत काम, निजी लाभ या अनुचित मंशा का मामला नहीं माना था। बैंक ने इस विषय की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक को भी दी थी।
गौरतलब है कि इससे पहले बैंक के तत्कालीन अंशकालिक अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती ने नैतिक आधार का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद बैंक के शीर्ष प्रबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं। हाल में अमेरिका की कुछ कानूनी कंपनियों ने भी महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम से जुड़े मामले में सामूहिक मुकदमे की प्रक्रिया शुरू की है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, जगदीशन के वर्तमान कार्यकाल की समाप्ति में अब दो महीने से भी कम समय बचा था। ऐसे में नए कार्यकाल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के बीच उनका खुद दोबारा नियुक्ति से पीछे हटना बैंक के लिए नए नेतृत्व की तलाश का रास्ता साफ करता है। अब बैंक के निदेशक मंडल और नियामक की निगाहें इस बात पर हैं कि एचडीएफसी बैंक की कमान आगे किसे सौंपी जाती है।
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