Fuel Efficiency पर सख्त हुई सरकार, 2027 से Passenger Vehicles के लिए लागू होंगे नए Carbon Emission मानक

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Ankit Jaiswal । Jul 16 2026 7:50PM

सरकार ने 2027 से लागू होने वाले कड़े ईंधन दक्षता मानकों का मसौदा पेश कर ऑटो सेक्टर में बड़े नीतिगत बदलाव के संकेत दिए हैं। कार्बन उत्सर्जन में कटौती और एथेनॉल जैसे जैव ईंधनों को मिलने वाली रियायतें देश में हरित परिवहन और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करेंगी। ईंधन दक्षता, कार्बन उत्सर्जन, ऑटोमोबाइल नियम 2027, जैव ईंधन और पर्यावरण संरक्षण इस पहल के मुख्य स्तंभ हैं।

देश में बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की खपत को कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने यात्री वाहनों के लिए नए ईंधन दक्षता और कार्बन उत्सर्जन मानकों का मसौदा सार्वजनिक किया है। मौजूद जानकारी के अनुसार इन प्रस्तावित नियमों को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की योजना है। फिलहाल सरकार ने सभी संबंधित पक्षों से 6 अगस्त तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।

बता दें कि नए प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य वाहनों की ईंधन खपत को कम करना और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को घटाना है। सरकार चाहती है कि वाहन निर्माता कंपनियां आने वाले वर्षों में अधिक ईंधन दक्ष और कम प्रदूषण फैलाने वाले मॉडल बाजार में उतारें। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से मानकों को और सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार वर्ष 2027-28 में प्रति 100 किलोमीटर ईंधन खपत का लक्ष्य 3.996 लीटर रखा गया है। वहीं वर्ष 2031-32 तक इसे घटाकर 3.327 लीटर प्रति 100 किलोमीटर करने का प्रस्ताव है। इसी अवधि में कार्बन उत्सर्जन की सीमा भी 94.76 ग्राम प्रति किलोमीटर से घटाकर 78.90 ग्राम प्रति किलोमीटर करने की योजना बनाई गई है।

गौरतलब है कि पहली बार सरकार ने इथेनॉल, संपीड़ित जैव गैस और अन्य जैव ईंधनों को विशेष महत्व देने का प्रस्ताव रखा है। यदि कोई वाहन निर्माता इन ईंधनों का उपयोग बढ़ाता है तो उसके वाहनों के कार्बन उत्सर्जन का आकलन करते समय उसे विशेष छूट मिल सकेगी। यानी वास्तविक उत्सर्जन की तुलना में कम उत्सर्जन मानकर नियमों के पालन का मूल्यांकन किया जाएगा। इससे स्वच्छ और रिन्यूएबल ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद की जा रही है।

प्रस्तावित मसौदे में यह भी कहा गया है कि जिन कंपनियों के वाहन ईंधन बचाने वाली आधुनिक तकनीकों से लैस होंगे, उन्हें अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा। मौजूद जानकारी के अनुसार ऐसी तकनीकों के आधार पर निर्धारित सीमा तक कार्बन उत्सर्जन में राहत का लाभ मिल सकेगा। इससे वाहन निर्माता नई तकनीकों में निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे।

बता दें कि इलेक्ट्रिक वाहन, बाहरी स्रोत से चार्ज होने वाले संकर वाहन, अधिक दूरी तय करने वाले इलेक्ट्रिक वाहन, मजबूत हाइब्रिड वाहन और फ्लेक्सिबल ईंधन वाले वाहनों को भी विशेष प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव रखा गया है। इन वाहनों को औसत ईंधन खपत की गणना के दौरान अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जिससे स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिल सकेगा।

एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह प्रस्तावित किया गया है कि अब नियमों के पालन का आकलन हर वर्ष के बजाय दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण तीन वर्ष का होगा, जबकि दूसरा चरण दो वर्ष का रहेगा। इससे वाहन कंपनियों को अपने उत्पादों और तकनीकों में सुधार के लिए अधिक समय और स्पष्ट दिशा मिल सकेगी।

गौरतलब है कि प्रस्तावित नियमों को लेकर वाहन उद्योग के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही है। छोटे और बड़े वाहनों का निर्माण करने वाली कंपनियों के बीच इन मानकों को लेकर मतभेद भी देखने को मिल रहे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि अंतिम नियम सभी सुझावों पर विचार करने के बाद ही तय किए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये नियम लागू होते हैं तो इससे ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी और स्वच्छ ऊर्जा आधारित वाहनों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भारत पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा सकेगा।

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