BlackRock के Larry Fink की बड़ी चेतावनी, Crude Oil $150 पार, Global Recession का बढ़ा खतरा

ब्लैकरॉक प्रमुख लैरी फ़िंक ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ होरमज़ में आपूर्ति बाधाओं से वैश्विक अर्थव्यवस्था एक गंभीर मंदी की चपेट में आ सकती है, जिसका असर महंगाई के रूप में आम लोगों पर पड़ेगा।
दुनिया भर में चल रहे तनाव के बीच अब ऊर्जा बाजार को लेकर बड़ी चिंता सामने आ रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।
गौरतलब है कि लैरी फ़िंक ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि अगर क्षेत्र में तनाव बना रहता है और आपूर्ति मार्गों पर खतरा जारी रहता है, तो इसका असर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।
बता दें कि यह बयान ऐसे समय आया है जब ब्लैकरॉक के प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था के हालात पर नजर बनाए हुए हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, उन्होंने साफ कहा कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो दुनिया एक गहरी आर्थिक मंदी की ओर जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि तेल की कीमतें इस बात पर निर्भर करेंगी कि संघर्ष खत्म होने के बाद हालात कैसे बनते हैं। अगर क्षेत्र में स्थिरता लौटती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा बहाल होता है, तो कीमतें कम भी हो सकती हैं।
गौरतलब है कि इस पूरे संकट का केंद्र स्ट्रेट ऑफ होरमज़ बना हुआ है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस गुजरता है। मौजूद जानकारी के अनुसार, इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
तेल बाजार में पहले ही इसका असर दिखने लगा है। कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, हालांकि कुछ कूटनीतिक कोशिशों की खबर के बाद थोड़ी राहत भी आई। लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
बता दें कि बढ़ती तेल कीमतों का सीधा असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, महंगा ईंधन गरीब और मध्यम वर्ग पर ज्यादा बोझ डालता है, क्योंकि इससे रोजमर्रा के खर्च और महंगाई दोनों बढ़ते हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, आयात पर निर्भर देशों में इसका असर और ज्यादा देखने को मिल सकता है, जहां घरेलू खर्च और ऊर्जा बिल में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है।
कुल मिलाकर, यह साफ है कि जब तक पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और इसका असर अर्थव्यवस्था से लेकर आम लोगों की जेब तक महसूस किया जाएगा।
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