Ishwar Chandra Vidyasagar Death Anniversary: बंगाल की कुरीतियों को मिटाने वाले महान Social Reformer, जिनकी विरासत आज भी है प्रेरणा

आज ही के दिन यानी की 29 जुलाई को ईश्वर चंद्र विद्यासागर का निधन हो गया था। उन्होंने भारत में विधवा विवाह कानून बनवाने में अहम योगदान दिया था। वह भारत के समाज सुधारक और शिक्षाविद थे।
19वीं सदी के महान दार्शनिक, समाज सुधारक, शिक्षाविद और लेखक ईश्वर चंद्र विद्यासागर का 29 जुलाई को निधन हो गया था। उन्होंने भारत में विधवा विवाह कानून बनवाने में अहम योगदान दिया था। उनको सामाजिक योगदान के लिए भारत के महान समाज सुधारकों में गिना जाता है। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर ईश्वर चंद्र विद्यासागर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
बंगाल के मेदिनीपुर में 26 सितंबर 1820 को विद्यासागर का जन्म हुआ था। उनके बचपन का नाम ईश्वरचंद्र बन्दोपाध्याय था। दर्शऩ और संस्कृत में उनके विशारद होने की वजह से उनको छात्र जीवन में विद्यासागर कहा जाने लगा। साल 1839 में उन्होंने कानून की पढ़ाई की। फिर साल 1841 में वह फोर्ट लयम कॉलेज में संस्कृत विभाग के प्रमुख के रूप में काम करने लगे। फिर वह कलकत्ता के संस्कृत कॉलेज में संस्कृत के प्रोफेसर बने। इसके बाद उसी कॉलेज के प्रिंसिपल बन गए।
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कुरीतियों के खिलाफ उठाई आवाज
वैसे तो पूरे भारत में 19वीं सदी में महिलाओं की स्थिति बेहद बुरी थी। लेकिन बंगाल में हालात काफी ज्यादा खराब थे। यहां पर काफी धार्मिक कुरीतियां थीं, जो हिंदू समाज में कलंक की तरह थीं। सती प्रथा पर कानून बन चुका था, लेकिन बाल विवाह और विधवाओं पर होने वाले अत्याचार बदस्तूर जारी थी।
विधवा विवाह के लिए प्रस्ताव
विधवा विवाह के लिए किए गए विद्यासागर के प्रयासों को आज भी सराहा जाता है। उन्होंने तत्कालीन सरकार को एक याचिका दी, जिसमें विधवाओं के पुनर्विवाह के लिए कानून बनाने की मांग की। साल 1856 में उनकी कोशिशें रंग लाईं और विधवा पुनर्विवाह कानून पारित हुआ। लेकिन इसके बाद भी लोगों में इस कानून के प्रति जागरुकता नहीं दिखी, तो उन्होंने दोस्त की शादी 10 साल की विधवा से कराई। इसके बाद अपने बेटे की शादी भी विधवा से करा दी।
नारी उत्थान के लिए प्रयास
ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा और समाज में स्थान दिलाने के लिए लगातार कोशिशें की। नारी शिक्षा के लिए की गई उनकी कोशिशों को आज भी याद किया जाता है।
मृत्यु
वहीं 29 जुलाई 1891 को ईश्वर चंद्र विद्यासागर का निधन हो गया था।
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