आप अंतिम उम्मीद...राहुल ने रद्द नहीं की रैली, व्यापारी पहुंचे सोनिया गांधी के पास

दिल्ली के व्यापारियों ने 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की रैली दिवाली के बाद कराने के लिए सोनिया गांधी से हस्तक्षेप की अपील की है। राहुल गांधी से कोई जवाब न मिलने पर व्यापारियों ने यह कदम उठाया। उन्हें डर है कि इस रैली से 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का त्योहारी कारोबार प्रभावित हो सकता है।
व्यापारी जानते हैं कि किसके साथ कारोबार करना है। अगर एक दरवाज़ा बंद मिलता है, तो वे दूसरा खटखटाते हैं। दिल्ली के व्यापारी समुदाय को डर है कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाले 'इंडिया' गठबंधन की 1 नवंबर की रैली से दिवाली के कारोबार में भारी खलल पड़ सकता है। इसे देखते हुए, उन्होंने शुक्रवार को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपील की कि वे इस विरोध मार्च को टलवा दें। क्या इस अपील के पीछे यह सोच है कि सोनिया गांधी, कांग्रेस के नई पीढ़ी के नेताओं की तुलना में कहीं अधिक उदार और लचीली हैं, जबकि नई पीढ़ी के नेताओं को अधिक सख्त और कठोर माना जाता है? राहुल गांधी को तीन पत्र लिखने के बाद भी कोई सकारात्मक जवाब न मिलने पर, 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने अब कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से संपर्क किया है और उनसे हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। व्यापारियों की मांग है कि रामलीला मैदान में होने वाली रैली को दिवाली के बाद तक टाल दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस रैली से दिल्ली के लगभग 20 प्रमुख बाजारों में 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है।
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कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन का 1 नवंबर का मार्च, कथित "वोट चोरी" और मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की प्रक्रिया के खिलाफ अपने अभियान को तेज करने की एक कोशिश है। इसके साथ ही, वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। सोनिया गांधी से संपर्क करना एक दिलचस्प कदम है, क्योंकि वे धीरे-धीरे पार्टी के रोजमर्रा के कामकाज से दूर हो गई हैं और अब राजनीतिक व संगठनात्मक मामलों में राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। फिर भी, दिल्ली के व्यापारियों का कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष के पास जाना शायद इसलिए है क्योंकि उन्हें लगता है कि वे एक ऐसे व्यक्ति तक पहुंच रहे हैं जो किसी बड़े राजनीतिक आयोजन के आर्थिक परिणामों पर विचार कर सकती हैं। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार रशीद किदवई ने 'इंडिया टुडे डिजिटल' को बताया कि सोनिया गांधी से संपर्क करने का फैसला काफी हद तक प्रतीकात्मक था।
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किदवई ने कहा राहुल एक सक्रिय खिलाड़ी हैं, जबकि सोनिया गांधी पार्टी की एक सम्मानित बुजुर्ग नेता (मैट्रियार्क) हैं। उन्होंने संकेत दिया कि व्यापारियों के इस कदम को दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें जेपी अग्रवाल भी शामिल हैं, का समर्थन या बढ़ावा मिला हो सकता है। कांग्रेस पर कई किताबें लिख चुके किदवई ने कहा कि अग्रवाल पुरानी दिल्ली के एक सम्मानित राजनेता हैं, जिनका प्रभाव पार्टी की सीमाओं से परे भी है। किदवई ने आगे कहा कि सोनिया गांधी आमतौर पर कांग्रेस के रोजमर्रा के कामकाज या राहुल के राजनीतिक फैसलों में दखल नहीं देतीं। इसके बजाय, वह पार्टी नेताओं और अन्य लोगों को राहुल से संपर्क करने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि सोनिया गांधी ने दिल्ली के व्यापारियों से मिलने का फैसला किया है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि यह बस एक सांकेतिक कदम हो। जैसे कि मुलाकात को छोटा रखना, विरोध प्रदर्शन के घंटों को कम करना, या दिन के पहले हिस्से में ही इसे खत्म कर देना। तो, क्या राहुल गांधी के नेतृत्व वाले 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के मार्च में सोनिया गांधी किसी तरह का दखल देंगी? और उनके व्यावहारिक नेतृत्व का इतिहास क्या रहा है, जिसके चलते दिल्ली के व्यापारियों ने उनसे संपर्क किया?
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