नौकरी का झांसा देकर Russian Army में भर्ती किया गया Visakhapatnam का युवक, मां ने मांगी मदद

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विशाखापत्तनम के जे. वामसी को रोजगार की तलाश के दौरान धोखे से रूसी सेना में शामिल कर युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। पीड़ित की मां जे. अप्पालकोंडा ने राज्य और केंद्र सरकार से अपने बेटे की सुरक्षित वतन वापसी के लिए गुहार लगाई है। इस मामले पर मंत्री नारा लोकेश ने भी संज्ञान लेते हुए त्वरित सहायता का आश्वासन दिया है।

विशाखापत्तनम, तीन नवंबर नौकरी की तलाश में रूस गए आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के एक युवक को कथित तौर पर धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया और बाद में उसे यूक्रेन की सीमा के पास युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। युवक की मां ने केंद्र और राज्य सरकार से हस्तक्षेप करके बेटे की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है। जे. वामसी की मां जे. अप्पालकोंडा ने कहा कि उनका बेटा रोजगार की तलाश में रूस गया था, लेकिन वहां पहुंचने पर उसे कोई काम नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि इसके बाद वह एक नेपाली नागरिक के संपर्क में आया, जिसने उसे यूक्रेन में बेहतर वेतन वाली नौकरी दिलाने का झांसा दिया और अपने साथ ले गया। अप्पालकोंडा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मेरा बेटा फल पैक करने के काम के लिए रूस गया था, लेकिन वहां उसे कथित तौर पर धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया और बाद में यूक्रेन की ओर ले जाया गया। मैं केंद्र और आंध्र प्रदेश सरकार से अपील करती हूं कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और उसकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करें।’’ उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश से अपने बेटे को वापस लाने में मदद करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा कोई सहारा नहीं है। मेरा एक बेटा और एक बेटी है और मेरे पति भी अब इस दुनिया में नहीं हैं। मैं बस अपने बेटे को वापस चाहती हूं।

मुझे और कुछ नहीं चाहिए।’’ उन्होंने सरकार से मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करने की अपील की। इस बीच, एक वीडियो संदेश में वामसी बताए जा रहे एक व्यक्ति ने चार अन्य भारतीयों के साथ दावा किया कि वे रोजगार की तलाश में रूस गए थे, लेकिन उन्हें धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया। अब उन्हें रूस-यूक्रेन सीमा के पास युद्ध के अग्रिम मोर्चे वाले इलाकों में भेजा जा रहा है।

वीडियो में व्यक्ति ने बताया कि वे रूस में एक नेपाली नागरिक के संपर्क में आए थे और उसने उन्हें सेना में भोजन पैक करने के काम पर अच्छी तनख्वाह देने का वादा किया था और उनकी भर्ती कराने में मदद की थी। वीडियो में दिख रहे लोगों ने कहा कि अब उन्हें रूस-यूक्रेन सीमा के पास तैनात किया जा रहा है और उनकी जान को खतरा है। वामसी बताए जा रहे व्यक्ति ने यह भी दावा किया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उन्हें रूसी नागरिकता दे दी गई है और उन्हें इसके बारे में तब पता चला, जब उन्होंने बाद में अपनी स्थिति के बारे में जानकारी मांगी।

उसने कहा, ‘‘जब भी हम अपनी भारतीय नागरिकता के बारे में पूछते हैं, तो हमें बताया जाता है कि अब हम भारतीय नागरिक नहीं हैं, बल्कि रूसी नागरिक बन गए हैं। हम केवल भारतीय नागरिकता चाहते हैं, रूसी नागरिकता नहीं। अगर हमें इसकी जानकारी होती, तो हम कभी इसके लिए सहमत नहीं होते।’’ उसके अनुसार, उनसे रूसी भाषा में लिखे दस्तावेजों पर उनका अर्थ बताए बिना हस्ताक्षर कराए गए।

उसने कहा, ‘‘ये हमारे आखिरी शब्द हो सकते हैं। हमें नहीं पता कि आगे क्या होगा, क्योंकि वे हमें सीधे युद्ध के अग्रिम मोर्चे पर भेज रहे हैं। हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि वह तुरंत हस्तक्षेप करे, हमारी जान बचाए और हमें वापस स्वदेश ले जाए।’’ इस अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए आंध्र प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश ने विदेश में फंसे भारतीयों की स्थिति पर चिंता जताई और उनकी सुरक्षित एवं जल्द वापसी के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

लोकेश ने ‘एक्स’ पर एक संदेश में कहा, ‘‘विदेश में फंसे हमारे नागरिकों की दुर्दशा देखकर मन भर आता है। मैं अपने कार्यालय से अनुरोध करता हूं कि वह उनकी मदद के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ तत्काल समन्वय करे और उनकी सुरक्षित एवं जल्द से जल्द घर वापसी सुनिश्चित करे।’’

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


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