Ayodhya Ram Mandir दान गबन केस में SIT चार्जशीट दर्ज, Supreme Court ने ट्रायल कोर्ट भेजा मामला

Ayodhya
ANI
अभिनय आकाश । Nov 2 2026 4:08PM

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाएं निपटा दी हैं। अदालत ने एसआईटी द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने पर संज्ञान लेते हुए स्थानीय अदालत को नियमानुसार ट्रायल आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर में दान की चोरी के आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा कर दिया। साथ ही, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस बयान पर ध्यान दिया कि विशेष जांच दल (SIT) ने इस मामले में आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। इसके बाद पीठ ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा कि स्थानीय अदालत अब इस मामले में सुनवाई (ट्रायल) आगे बढ़ाएगी।
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उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIT की जांच में यह सामने आया है कि मंदिर में मिले दान की रकम को गिनती के दौरान कथित तौर पर हड़प लिया गया था। मेहता ने बताया कि कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर इस हड़पी गई रकम को संपत्तियों में निवेश कर दिया, जबकि अन्य लोगों ने इसे अपने बैंक खातों में जमा कर दिया।

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गुण-दोष पर कोई राय नहीं


अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को कानून के अनुसार आगे बढ़ने का निर्देश दिया और याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी कि वे कानूनी प्रावधानों के तहत कार्यवाही के दौरान मजिस्ट्रेट की सहायता कर सकते हैं। आदेश में कहा गया, चूंकि इसमें जनहित का पहलू शामिल है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को मजिस्ट्रेट की सहायता करने की छूट दी जाती है, क्योंकि कानून के तहत अपराध का शिकार व्यक्ति अदालत की मदद कर सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों के गुण-दोष (मेरिट्स) पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। शीर्ष अदालत ने कहा एक याचिका का निपटारा करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट को कानून के अनुसार आगे बढ़ने का निर्देश दिया गया है। चूंकि इसमें जनहित का पहलू शामिल है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को मजिस्ट्रेट की सहायता करने की छूट दी गई है, क्योंकि कानून के तहत अपराध का शिकार व्यक्ति अदालत की मदद कर सकता है। यह स्पष्ट किया जाता है कि इस अदालत ने आरोपों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। 21 सितंबर को, अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी की जांच कर रही, कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच टीम (SIT) ने अदालत को बताया कि वह 25 सितंबर तक या उससे पहले अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर देगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर स्थल से जुड़ी नई याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया


सुनवाई के दौरान, CJI ने राम जन्मभूमि विवाद पर पांच जजों की बेंच के पिछले फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली एक नई याचिका पर हैरानी जताई। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि याचिका में पिछले फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता को जवाब देते हुए, CJI ने कहा कि वे सिविल कोर्ट जा सकते हैं और वहां मुकदमा दायर कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश चंदे की चोरी के आरोपों पर कोई फैसला नहीं देता है। अब यह मामला कानून के अनुसार ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष आगे बढ़ेगा।

 

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