CEC नियुक्ति नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में बंटी राय, कहा- बड़ी बेंच पर CJI लें निर्णय

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अभिनय आकाश । Sep 23 2026 3:21PM

चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से सीजेआई को हटाने वाले 2023 के कानून पर सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने बंटा हुआ फैसला सुनाया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की अलग राय के कारण मामला सीजेआई के पास भेजा गया है। अब तीन जजों की बेंच तय करेगी कि क्या इसकी सुनवाई पांच जजों की पीठ करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बंटा हुआ फ़ैसला सुनाया। इस कानून के तहत चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से CJI को हटा दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच यह तय करेगी कि क्या इस मामले की सुनवाई पांच जजों की बेंच को करनी चाहिए। 

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जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस SC शर्मा ने प्रक्रिया से जुड़े इस मुद्दे पर सुनवाई की
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस SC शर्मा की दो जजों वाली बेंच ने प्रक्रिया से जुड़े इस खास मुद्दे पर सुनवाई की। अब मामला 2023 के संशोधन कानून से जुड़ा है, जिसके तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की जगह केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के साथ शामिल किया गया है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा हमने इन याचिकाओं और आवेदनों पर पांच दिनों से ज़्यादा समय तक सुनवाई की। संस्थागत एकजुटता के लिए एक ही राय रखना बेहतर होता। दुर्भाग्य से हमारी राय बंटी हुई है। याचिका में याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित होती है और कार्यपालिका को दो-एक का बहुमत मिल जाता है, जबकि केंद्र ने इस संरचना का बचाव किया। SC के दोनों जजों ने निर्देश दिया कि इन याचिकाओं को CJI सूर्यकांत के समक्ष रखा जाए ताकि मामले की सुनवाई के लिए उचित संख्या वाली बेंच का गठन किया जा सके। 

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याचिकाओं पर जस्टिस SC शर्मा और जस्टिस दत्ता की राय अलग-अलग
CEC और ECs को चुनने वाले पैनल से CJI को बाहर रखने वाले कानून के मामले को बड़ी बेंच को सौंपने की मांग वाली याचिकाओं पर जस्टिस SC शर्मा और जस्टिस दत्ता की राय अलग-अलग थी। सुनवाई के दौरान, जस्टिस दीपांकर दत्ता ने 2023 के उस कानून की वैधता के खिलाफ याचिकाओं को बड़ी बेंच को सौंपने से इनकार कर दिया, जिसके तहत CEC और ECs को चुनने वाले पैनल से CJI को बाहर रखा गया है। फैसला सुनाते हुए, जस्टिस दत्ता ने चुनाव आयोग की आज़ादी और निष्पक्षता को लेकर व्यापक चिंताएं जताईं और सवाल उठाया कि क्या 2023 के कानून के तहत नियुक्ति की प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए ज़रूरी संवैधानिक मानकों को पूरा करती है।

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