Rajnath Singh बोले रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बाहरी निर्भरता रोकने के लिए जरूरी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नयी दिल्ली में दिल्ली डिफेंस डायलॉग को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता का मकसद प्रौद्योगिकीय संप्रभुता हासिल करना है। उन्होंने जोर दिया कि देश की रक्षा जरूरतें विदेशी निर्भरता की गुलाम नहीं बननी चाहिए। साथ ही उन्होंने 2047 तक रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने का आह्वान किया।
नयी दिल्ली, तीन नवंबर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत के ‘आत्मनिर्भरता’ के प्रयास को प्रौद्योगिकीय संप्रभुता हासिल करने के उपक्रम के रूप में समझना चाहिए। सिंह ने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि रक्षा क्षेत्र की महत्वपूर्ण जरूरतें बाहरी निर्भरता की बंधक न बनें। यहां एक ‘थिंक टैंक’ द्वारा आयोजित ‘दिल्ली डिफेंस डायलॉग’ को संबोधित करते हुए सिंह ने युद्ध में प्रौद्योगिकी के महत्व को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में सैन्य तैयारियों को प्रौद्योगिकीय तैयारियों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए रक्षा क्षेत्र में हमारा लक्ष्य महत्वाकांक्षी होना चाहिए।’’ रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि आज पारंपरिक और गैर-पारंपरिक युद्ध के बीच का अंतर लगातार धुंधला होता जा रहा है। दिल्ली स्थित मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (आईडीएसए) द्वारा आयोजित इस संवाद में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, देश-विदेश के विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए।
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘आत्मनिर्भरता को प्रौद्योगिकीय संप्रभुता हासिल करने की दिशा में किए गए उपक्रम के रूप में समझा जाना चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं है कि हम हर चीज का उत्पादन खुद करें... इसका अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि रक्षा क्षेत्र की हमारी महत्वपूर्ण जरूरतें बाहरी निर्भरता की गुलाम न बनें।’’ उन्होंने यह भी आगाह किया कि सहयोग के बिना आत्मनिर्भरता हमारी प्रौद्योगिकीय संभावनाओं को सीमित कर सकती है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता से स्वदेशी क्षमताएं मजबूत होनी चाहिए और सह-विकास को बढ़ावा मिलना चाहिए।
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