रेस कोर्स मस्जिद में अभी नहीं पढ़ी जा सकेगी नमाज, दिल्ली HC का फैसला, केंद्र ने भी दिया ये आश्वासन

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ANI
अभिनय आकाश । Oct 29 2026 1:16PM

दिल्ली हाई कोर्ट ने रेस कोर्स मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति मांगने वाली याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिया कि मामले का निपटारा होने तक मस्जिद को गिराने की कोई कार्रवाई नहीं होगी। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर तय की है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक नमाज़ी को राहत देने से इनकार कर दिया, जिसने रेस कोर्स मस्जिद में नमाज़ पढ़ने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, केंद्र सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि जब तक मस्जिद से जुड़े मामले पर कोई फैसला नहीं हो जाता, तब तक इसे गिराने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। सैयद अहमद सऊद ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने मस्जिद को गिराए जाने के डर और वहां जाने पर लगी कथित पाबंदियों के बीच मस्जिद की सुरक्षा की मांग की थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान, लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने जस्टिस अनीश दयाल के सामने यह भरोसा दिलाया। केंद्र सरकार के वकील आशीष दीक्षित ने अदालत को बताया कि दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से दी गई अर्जी पर जल्द से जल्द, यानी चार सप्ताह के भीतर फैसला ले लिया जाएगा।

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उन्होंने कहा इस बीच, हम कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तारीख तय की है। केंद्र ने नमाज़ पढ़ने वाले व्यक्ति के याचिका दायर करने के अधिकार पर सवाल उठाया। सुनवाई के दौरान, दीक्षित ने याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि सऊद के पास अदालत में जाने का कोई आधार (locus) नहीं है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर व्यक्तिगत नमाजियों को ऐसी याचिकाएं दायर करने की अनुमति दी जाती है, तो इससे इस तरह के कई और मामलों के रास्ते खुल सकते हैं। सऊद की ओर से पेश हुए वकील एम. सुफियान सिद्दीकी ने केंद्र के पक्ष पर आपत्ति जताई। याचिका में मस्जिद की सुरक्षा और नमाजियों के लिए वहां जाने की अनुमति मांगी गई है। सऊद का कहना है कि आने-जाने पर लगी पाबंदियों की वजह से नमाजी वहां पहुंचकर नमाज नहीं पढ़ पा रहे हैं।

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याचिका क्या है?


यह याचिका सैयद अहमद सऊद नाम के एक नमाज़ी ने दायर की है। उन्होंने मस्जिद की सुरक्षा की मांग की है और कहा है कि मस्जिद में जाने पर लगी पाबंदियों, और साथ ही बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए जाने की वजह से, मस्जिद के भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे पहले हुई एक सुनवाई के दौरान, सिद्दीकी ने दलील दी थी कि मस्जिद को तोड़े जाने का खतरा है। उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड पर भी आरोप लगाया कि वे इस मुद्दे को सुलझाने के लिए ज़रूरी कदम उठाने में नाकाम रहे हैं।

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