एआई दौर में भारतीय संगीत और भाषाएं बचाने के लिए विशेष प्रयास जरूरी: प्रसून जोशी

प्रसार भारती के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार के बीच देश की सांस्कृतिक धरोहर और लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण पर बल दिया है। संगीत ऐप स्पॉटिफाई के एक कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई इंसानी अनुभवों पर आधारित है और मनुष्य इसके साथ मिलकर काम करेंगे।
नयी दिल्ली, एक सितंबर प्रसार भारती के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारत की सांस्कृतिक विरासत, संगीत और विलुप्त हो रही भाषाओं को बचाने व सुरक्षित रखने को लेकर मंगलवार को गहरी चिंता जताई। जोशी ने संगीत ऐप ‘स्पॉटिफाई’ की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, हमारी सभ्यता से जुड़ी कुछ भाषाओं, कुछ रचनाओं को बचाने व सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। एआई की दुनिया में हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि कला नहीं बच पाएगी, हालांकि कलाकारों को कुछ अवसर जरूर मिलेंगे।
जोशी ने कहा कि मनुष्य एआई के साथ मिलकर काम करेंगे और दोनों के बीच कोई ऊंच-नीच या श्रेष्ठता का संबंध नहीं होगा। जोशी ने कहा, मैं एआई को कृत्रिम बुद्धिमत्ता नहीं मानता। इसमें कुछ भी कृत्रिम नहीं है।
यह पूरी तरह मनुष्यों से मिली सूचनाओं और उनके अनुभवों से जुड़ा है।” कार्यक्रम से इतर जोशी ने कहा कि वह संगीत समेत भारत की सांस्कृतिक विरासत को बचाने व सुरक्षित रखने को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा, सिनेमा और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े एक समूह का मैं नेतृत्व कर रहा हूं। एआई, रचनात्मक क्षेत्र से जुड़ी अर्थव्यवस्था, भविष्य में रचनात्मकता किस दिशा में जाएगी और इसमें सरकार तथा निजी कंपनियां किस तरह मिलकर काम कर सकती हैं, इन सभी मुद्दों पर चर्चा जारी है।
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