Parliament Diary। भारी हंगामे के बीच पेश हुआ बाल विवाह निषेध संशोधन बिल, विपक्षी दलों का हल्ला बोल जारी

लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बाल विवाह निषेध संशोधन विधेयक 2021 पेश किया गया। जिसका कांग्रेस, टीएमसी, एनसीपी, डीएमके, शिवसेना जैसे कई दलों ने विरोध किया और फिर विधेयक को व्यापक विचार विमर्श के लिए संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग की।
संसद का शीतकालीन सत्र अब समापान की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में विपक्ष लखीमपुर खीरी मामले को लेकर लामबंद हो गया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी सदस्यों ने अजय मिश्रा की बर्खास्तगी की मांग करते हुए महात्मा गांधी की प्रतिमा से लेकर विजय चौक तक मार्च निकाला। वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार बचे हुए विधेयकों को जल्द से जल्द पास करवाने में जुटी हुई है। इसी क्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा में बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक 2021 पेश किया। जिसमें लड़कियों के विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु को 18 साल से बढ़ाकर पुरुषों के बराबर 21 साल करने का प्रस्ताव है।
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विपक्ष का मार्च
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लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बाल विवाह निषेध संशोधन विधेयक 2021 पेश किया गया। जिसका कांग्रेस, टीएमसी, एनसीपी, डीएमके, शिवसेना जैसे कई दलों ने विरोध किया और फिर विधेयक को व्यापक विचार विमर्श के लिए संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग की। जिस पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि विपक्षी दलों के सदस्य अगर थोड़ा इंतजार करते और उनकी बात सुनते तो उन्हें पता चल जाता कि वह स्वयं ही सरकार की ओर से इस विधेयक को स्थायी समिति को भेजने का प्रस्ताव कर रही हैं ताकि इस पर विस्तृत चर्चा हो सके। उन्होंने कहा कि सभी धर्म, जाति एवं समुदाय में महिलाओं को विवाह की दृष्टि से समानता का अधिकार मिलना चाहिए। लड़कियों और लड़कों के विवाह की आयु एक समान 21 वर्ष होनी चाहिए। इस दौरान सदन में हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा की कार्यवाहीसंसद में विपक्षी सदस्यों के भारी विरोध के बीच निर्वाचन विधि (संशोधन) विधेयक, 2021 को पारित कर दिया गया। विधेयक में मतदाता सूची में दोहराव और फर्जी मतदान रोकने के लिए मतदाता पहचान कार्ड और सूची को आधार कार्ड से जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है। राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों के भारी विरोध के बीच इस विधेयक को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। जबकि विपक्षी सदस्य विधेयक को प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग कर रहे थे। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।अन्य न्यूज़














